सरगुजा @ सरगुजा की जनता ने विधानसभा में आवाज़ उठाने दिया था जनादेश, पर अब जानलेवा गड्ढों और हादसों के साए में ज़िंदगी; 3 खुलासों के बाद भी मंत्री राजेश अग्रवाल की ‘रहस्यमयी चुप्पी’!
सरगुजा / पिलखा भूमि ‘पिलखा भूमि’ द्वारा मंत्री राजेश अग्रवाल के 8 महीने पुराने ऑन-कैमरा वादों, ₹61.34 करोड़ के ‘फेसबुकिया प्रचार’, 12 महीने बारिश के तर्क और 15 अगस्त के भाषणों बनाम ज़मीनी बदहाली की पोल खोलने के बाद पूरे सरगुजा संभाग में राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल तेज़ हो गई है। लगातार तीन कड़े और तथ्यात्मक खुलासों के बाद जहां पूरा प्रशासनिक तंत्र और आम जनता जवाबदेही की उम्मीद कर रही है, वहीं माननीय मंत्री राजेश अग्रवाल जी और उनका पूरा अमला लगातार ‘रहस्यमयी चुप्पी’ साधे बैठा है!
विधानसभा में जनता की आवाज़ बनने के लिए मिला था जनादेश, बहानों की फाइलें थमाने के लिए नहीं!
लोकतंत्र में जनता किसी जनप्रतिनिधि को केवल पद या कुर्सी सौंपने के लिए वोट नहीं देती। सरगुजा की जागरूक जनता ने कतारों में लगकर अपना कीमती जनादेश इसलिए दिया था ताकि उनके चुने हुए प्रतिनिधि विधानसभा में सरगुजा के बुनियादी हकों की लड़ाई लड़ सकें।
जनता का भरोसा था कि चुने हुए जनप्रतिनिधि क्षेत्र के लिए बेहतर सड़कें, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सुदृढ़ स्वास्थ्य सेवाएं और चुस्त प्रशासनिक व्यवस्था सुनिश्चित कराएंगे। लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि बुनियादी विकास के लिए शासन स्तर पर मज़बूती से पैरवी करने के बजाय, आज सड़कों पर उतरते ही जनता को केवल तारीखों, फाइलों और बहानों का झुनझुना थमा दिया जा रहा है।
जानलेवा गड्ढों में अगर किसी स्कूली बच्चे या राहगीर के साथ हुआ बड़ा हादसा, तो कौन लेगा ज़िम्मेदारी?
सड़कों की बदहाली अब केवल हिचकोले खाने और धूल फांकने तक सीमित नहीं है, यह सीधे तौर पर आम नागरिकों और नौनिहालों की जिंदगी से जुड़ा अत्यंत गंभीर और संवेदनशील मामला बन चुका है।
स्कूली बच्चों और छात्र-छात्राओं की जान सांसत में: इसी जर्जर, कीचड़ और जानलेवा गड्ढों से भरे रास्तों से रोज़ाना हज़ारों स्कूली छात्र-छात्राएं, छोटे बच्चे और उनके अभिभावक गुज़रते हैं। कई स्थानों पर फिसलन और गहरे गड्ढों के कारण दोपहिया वाहन अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं।
इमरजेंसी में तड़पते मरीज़ और एम्बुलेंस: जीवन और मौत से जूझ रहे गंभीर मरीज़ों को अस्पताल ले जाने वाली एम्बुलेंस इन गड्ढों में फंसकर घंटों समय गंवा रही हैं।
‘पिलखा भूमि’ का सीधा और चुभता सवाल: अगर कल के दिन इन जानलेवा गड्ढों की वजह से कोई अप्रिय घटना घट जाए, किसी स्कूली बच्चे, राहगीर या दैनिक यात्री के साथ कोई बड़ा सड़क हादसा हो जाए—तो उस जान-माल के नुकसान की नैतिक और प्रशासनिक ज़िम्मेदारी कौन लेगा? क्या तब भी लोक निर्माण विभाग और जनप्रतिनिधि बारिश और तकनीकी अड़चनों की आड़ लेकर पल्ला झाड़ लेंगे?
सवालों से क्यों बच रहा है तंत्र? खामोशी खुद बयां कर रही है हकीकत!
‘पिलखा भूमि’ ने जब ऑन-कैमरा साक्ष्यों और प्रशासनिक स्वीकृतियों के साथ मंत्रीजी के बयानों का मिलान किया, तो उनके पास न तो 8 महीने पुराने वादे का कोई ठोस जवाब दिखा, न ही ’20 साल की चकाचक सड़क’ वाले नए दावे का कोई धरातलीय क्रियान्वयन।
सरगुजा की जनता के 3 सीधे और संवैधानिक सवाल:
मौन क्यों साधे हैं जनप्रतिनिधि? — अगर ‘पिलखा भूमि’ द्वारा सार्वजनिक बयानों के आधार पर उठाए गए सवालों में कोई भी तथ्य गलत है, तो मंत्री कार्यालय आधिकारिक तौर पर सामने आकर जनता को सच्चाई क्यों नहीं बताता?
स्वीकृत बजट धरातल पर कब दिखेगा? — गांधी चौक से रेलवे स्टेशन मार्ग, दरीमा रोड, बनारस रोड, मनेंद्रगढ़ रोड, रायगढ़ रोड और बिलासपुर रोड पर आज भी जनता धूल और गड्ढों से जूझ रही है। क्या इन सड़कों का निर्माण सिर्फ कागज़ों और विज्ञापनों में ही पूरा होगा?
अस्थायी लीपापोती की जवाबदेही किसकी? — बारिश और वीआईपी दौरों के नाम पर जो घटिया पैचवर्क कराया जाता है और पहली ही फुहार में बह जाता है, उस पर खर्च होने वाले जनता के टैक्स के पैसों की जवाबदेही किसकी तय होगी?
बहानों का खेल खत्म, जब तक पक्की सड़क नहीं तब तक जारी रहेगा ‘पिलखा भूमि’ का महा-अभियान!
‘पिलखा भूमि’ स्पष्ट करता है कि जनप्रतिनिधियों के मौन रहने या प्रशासनिक अनदेखी से जनता के बुनियादी सवाल दबने वाले नहीं हैं।
अगर गांधी चौक से रेलवे स्टेशन मार्ग पर स्वीकृत ₹61.34 करोड़ के फोरलेन निर्माण समेत सरगुजा की तमाम प्रमुख बदहाल सड़कों का पक्का डामरीकरण धरातल पर तत्काल प्रभाव से शुरू नहीं कराया गया, तो जवाबदेही तय करने का यह सिलसिला इसी बेबाकी के साथ भाग-दर-भाग जारी रहेगा!
संपादकीय एवं डिस्क्लेमर (Editorial & Disclaimer):यह समाचार रिपोर्ट सरगुजा संभाग की बुनियादी सड़क सुविधाओं, सड़क सुरक्षा, जनप्रतिनिधियों द्वारा समय-समय पर दिए गए पूर्व सार्वजनिक वक्तव्यों एवं प्रशासनिक कार्यप्रणाली के निष्पक्ष विश्लेषण पर आधारित है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के अंतर्गत जनहित (Public Interest) में पारदर्शी शासन व्यवस्था सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह श्रृंखला प्रकाशित की जा रही है। इसका उद्देश्य किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत साख को ठेस पहुँचाना नहीं, बल्कि जन-सुरक्षा और जन-समस्याओं के समाधान हेतु शासन-प्रशासन का ध्यानाकर्षण कराना है। संबंधित जनप्रतिनिधि अथवा विभाग अपना आधिकारिक पक्ष रखने के लिए सदैव आमंत्रित हैं।