
पिलखा भूमि ब्यूरो | मैनपाट / सीतापुर
चोरकीपानी धाम (मैनपाट) में अंतिम सोमवार को होगा विशाल जलाभिषेक, 419 किमी और 5 लाख कदमों की ऐतिहासिक पदयात्रा बनी क्षेत्र में चर्चा का विषय
अडिग आस्था और 419 किमी का कठिन सफर भोलेनाथ के जयकारों और ‘हर-हर महादेव’ की गूंज के साथ वाराणसी के पावन अस्सी घाट से पवित्र गंगाजल लेकर निकली ऐतिहासिक कांवड़ यात्रा अब अपने अंतिम पड़ाव की ओर तेजी से बढ़ रही है। कांवड़ियों का यह विशाल जत्था छत्तीसगढ़ की सीमा पर पहुंच चुका है, जहां स्थानीय श्रद्धालुओं और ग्रामीणों ने कांवड़ियों का जोरदार व आत्मीय स्वागत किया।

यह कांवड़ यात्रा क्षेत्र की सबसे लंबी और कठिन यात्राओं में से एक मानी जाती है। कुल 419 किलोमीटर की यह दूरी कांवड़िए पैदल तय कर रहे हैं, जो मैनपाट ब्लॉक के प्रसिद्ध व स्वयंभू शिवलिंग चोरकीपानी मंदिर पहुंचकर संपन्न होगी।
‘महायात्रा 360’ का यह पांचवां गौरवशाली वर्ष
‘महायात्रा 360’ के नाम से विख्यात इस पावन आयोजन का यह लगातार 5वां वर्ष है। प्रतिवर्ष सावन मास में 13 अगस्त को वाराणसी के अस्सी घाट से गंगाजल उठाकर इस यात्रा का संकल्प लिया जाता है। सावन के अंतिम सोमवार को चोरकीपानी धाम में बाबा भोलेनाथ का भव्य जलाभिषेक, विशेष हवन-पूजन और विशाल भंडारे के साथ इस महायात्रा का विधिवत समापन होता है।

विधायक बनने से पहले से जारी है यह अटूट संकल्प
इस पूरी महायात्रा का नेतृत्व सीतापुर विधानसभा क्षेत्र के लोकप्रिय विधायक श्री रामकुमार टोप्पो कर रहे हैं। गौरतलब है कि रामकुमार टोप्पो विधायक बनने से पहले से ही लगातार इस कठिन साधना और पदयात्रा को पूरा करते आ रहे हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि यह बाबा काशी विश्वनाथ, मां गंगा और चोरकीपानी बाबा भोलेनाथ की असीम कृपा और आशीर्वाद का ही प्रतिफल है कि हर वर्ष यह विशाल यात्रा निर्विघ्न और पूरे उत्साह के साथ संपन्न होती है।

हर कदम सीतापुर की जनता की खुशहाली के नाम: विधायक टोप्पो
छत्तीसगढ़ बॉर्डर पर पहुंचने के दौरान विधायक श्री रामकुमार टोप्पो ने अपने संदेश में कहा:
“वाराणसी अस्सी घाट से सीतापुर विधानसभा स्थित चोरकीपानी मंदिर तक का यह सफर लगभग 5 लाख कदमों का है। मेरा हर एक कदम सीतापुर विधानसभा के प्रत्येक नागरिक के सुख, समृद्धि, शांति और निरंतर उन्नति के लिए समर्पित है। बाबा भोलेनाथ से यही प्रार्थना है कि क्षेत्रवासियों ने मुझ पर जो विश्वास जताते हुए दायित्व सौंपा है, उसे मैं पूरी निष्ठा और सामर्थ्य से पूरा कर सकूं।”
फिलहाल, सीमा पर प्रवेश के बाद कांवड़ियों के इस दल का उत्साह चरम पर है और पूरे क्षेत्र का माहौल पूरी तरह शिवमय हो चुका है।







































