
जो देश की रक्षा में लहू बहाते हैं, क्या सरकार उनके शौर्य का मोल जानती है?
पिलखाभूमि रायपुर/सीतापुर: छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में आज एक ऐसी गूंज सुनाई दी जिसने प्रदेश के हजारों जवानों और उनके परिवारों के चेहरों पर उम्मीद जगा दी है। पूर्व सैनिक और सीतापुर के युवा विधायक रामकुमार टोप्पो ने सदन में अपनी ही सरकार से वीरता पदक प्राप्त जवानों के ‘सम्मान और अधिकार’ को लेकर तीखे सवाल पूछे हैं।
क्या पूछा विधायक टोप्पो ने?
सीतापुर विधायक ने गृह मंत्री से सीधे सवाल किया कि जो जवान अपनी जान हथेली पर रखकर छत्तीसगढ़ पुलिस, सशस्त्र बल या भारतीय सेना में रहकर वीरता पदक (Gallantry Medals) जीतते हैं, उन्हें राज्य सरकार की ओर से कितनी सम्मान राशि दी जाती है?
उन्होंने आंकड़ों के साथ घेरा और पूछा
2024 से 26 जनवरी 2026 तक छत्तीसगढ़ के कितने शूरवीरों को वीरता पदक मिला? उनके नाम और वर्तमान स्थिति क्या है?
राष्ट्रपति वीरता पदक मिलने पर केंद्र सरकार तो भत्ता देती है, लेकिन छत्तीसगढ़ सरकार अपनी ओर से जवानों को क्या प्रोत्साहन दे रही है?
क्या ‘छत्तीसगढ़ शौर्य पदक’ प्राप्त करने वाले कार्मिकों को उचित मौद्रिक भत्ता मिल रहा है या वे सिर्फ कागजों तक सीमित हैं?
क्यों खास है यह सवाल?
विधायक रामकुमार टोप्पो खुद एक सैनिक रहे हैं, इसलिए वे जानते हैं कि एक पदक के पीछे कितनी हड्डियां गलती हैं और कितना खून बहता है। उन्होंने सदन का ध्यान इस ओर खींचा कि “रक्षकों का सम्मान केवल तालियों से नहीं, बल्कि उनके उचित पारितोषिक से होना चाहिए।”
जवानों के लिए बड़ी उम्मीद!
अगर सरकार विधायक टोप्पो के इन सवालों पर सकारात्मक कदम उठाती है, तो छत्तीसगढ़ के उन सैकड़ों जांबाजों को आर्थिक मजबूती मिलेगी जो बस्तर के जंगलों से लेकर देश की सीमाओं तक तैनात हैं।
आपकी क्या राय है?
क्या छत्तीसगढ़ के वीर जवानों को अन्य राज्यों की तुलना में अधिक सम्मान राशि मिलनी चाहिए?
अपनी राय कमेंट में बताएं और इस खबर को इतना शेयर करें कि सरकार तक जवानों की आवाज पहुँच जाए!







