
पिलखाभूमि रायपुर/सीतापुर छत्तीसगढ़ के शिमला मैनपाट में 21 करोड़ की भारी-भरकम लागत से बने सैला रिसॉर्ट की असलियत अब विधानसभा की दहलीज तक पहुँच गई है। सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो ने सदन में सरकार को आड़े हाथों लेते हुए रिसॉर्ट के निर्माण और बंदरबांट को लेकर कई तीखे सवाल दागे जिससे पर्यटन विभाग में हड़कंप मच गया है।
करोड़ों डकार गए, पर काम कहाँ है? विधायक का सीधा प्रहार
विधायक रामकुमार टोप्पो ने सदन में पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल से दो टूक पूछा कि आखिर 2137.38 लाख रुपये की लागत से बना यह रिसॉर्ट कागजों पर तो चमक रहा है लेकिन जमीन पर इसकी क्या स्थिति है? विधायक ने साफ कहा कि 8.093 हेक्टेयर में फैले इस प्रोजेक्ट में अभी भी कई काम अधूरे पड़े हैं, जबकि कागजों में इसे पूर्ण बताया जा रहा है।
मंत्री का जवाब- सुविधाओं की लंबी लिस्ट, पर मेंटेनेंस का मजाक
पर्यटन मंत्री ने बचाव करते हुए बताया कि रिसॉर्ट में ट्राइबल वर्कशॉप, साइकिल ट्रैक, हर्बल हाट और ओपन एंफीथियेटर जैसी सुविधाओं का जाल बिछाया गया है। लेकिन जब बात रखरखाव की आई, तो पता चला कि इसके मासिक मेंटेनेंस के लिए मात्र 67,630 रुपये की राशि तय है।
बाहरी ठेकेदार क्यों? लोकल युवाओं को क्यों नहीं मिलता काम?
विधायक टोप्पो यहीं नहीं रुके, उन्होंने रिसॉर्ट के मेंटेनेंस और संचालन में बाहरी दखल पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने दहाड़ते हुए मांग की
जब करोड़ों का रिसॉर्ट हमारे मैनपाट की छाती पर बना है, तो इसका फायदा बाहरी लोगों को क्यों मिले? मेंटेनेंस जैसे कामों के लिए किसी बड़े ‘अनुभव’ की जरूरत नहीं है। सरकार तत्काल स्थानीय स्व-सहायता समूहों (SHGs) को इसमें शामिल करे, ताकि मैनपाट के युवाओं और महिलाओं के चूल्हे जल सकें।
विधायक की चेतावनी- कागजी घोड़े नहीं चलेंगे होगा स्थल निरीक्षण
विधायक रामकुमार टोप्पो ने साफ चेतावनी दी है कि वे केवल मंत्री के जवाब से संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने मांग की है कि मौके पर जाकर Physical Verification (स्थल निरीक्षण) किया जाए ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर सब कुछ सही है तो काम अधूरा क्यों दिख रहा है?
निष्कर्ष- विधायक की इस आक्रामकता ने यह साफ कर दिया है कि अब मैनपाट के संसाधनों पर पहला हक वहां के आदिवासियों और स्थानीय लोगों का होगा। करोड़ों के भ्रष्टाचार और अधूरे निर्माण को अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।







