
पिलखाभूमि रायपुर: महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने विभाग के बजट और योजनाओं की समीक्षा के दौरान बेहद कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट लहजे में अधिकारियों को चेतावनी दी है कि महिलाओं और बच्चों के कल्याण के लिए आवंटित धन की एक-एक पाई का हिसाब पारदर्शी होना चाहिए। मंत्री ने दो टूक कहा कि इस प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर लापरवाही या वित्तीय अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
जमीनी हकीकत पर जोर: “कागजी आंकड़े नहीं, परिणाम चाहिए”
मंत्रालय (महानदी भवन) में आयोजित उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में राजवाड़े ने अधिकारियों के काम करने के तरीके पर असंतोष जाहिर करते हुए निर्देश दिया कि अधिकारी केवल एयर-कंडीशंड कमरों में बैठकर कागजी रिपोर्ट न तैयार करें।

फील्ड विजिट अनिवार्य: अधिकारियों को अब अनिवार्य रूप से मैदानी निरीक्षण (Field Visit) करना होगा ताकि योजनाओं की जमीनी सच्चाई सामने आ सके।
रियल-टाइम डेटा: कुपोषण को जड़ से मिटाने के लिए ‘पोषण ट्रैकर’ में डेटा की एंट्री में हेरफेर या देरी को गंभीर चूक माना जाएगा।
वित्तीय अनुशासन और समय सीमा का अल्टीमेटम
मंत्री ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के खर्चों का लेखा-जोखा लेते हुए प्रशासन को सख्त अनुशासन में रहने के निर्देश दिए:
15 दिवसीय समीक्षा: अब जिला कार्यक्रम अधिकारियों को हर 15 दिन में खर्चों की समीक्षा करनी होगी। यदि राशि का उपयोग समय पर नहीं हुआ, तो संबंधित अधिकारी की जवाबदेही तय होगी।
डेडलाइन 2026: सक्षम आंगनबाड़ी योजना के तहत हो रहे निर्माण और उन्नयन कार्यों को हर हाल में वर्ष 2026 तक गुणवत्ता के साथ पूर्ण करने का अंतिम अल्टीमेटम दिया गया है।
विभागीय परफॉरमेंस और लक्ष्य
यद्यपि छत्तीसगढ़ प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना में देश में प्रथम स्थान पर है, लेकिन मंत्री ने इस सफलता को बरकरार रखने और इसे अंतिम पात्र महिला तक पहुँचाने के लिए अस्पतालों में व्यापक प्रचार के आदेश दिए हैं।
मंत्री का कड़ा संदेश: “बजट का प्रावधानित हिस्सा केवल और केवल लाभार्थी मूलक योजनाओं पर ही खर्च होना चाहिए। हमारा लक्ष्य केवल बजट खत्म करना नहीं, बल्कि पात्र हितग्राहियों का जीवन बदलना है।”
इस बैठक ने स्पष्ट कर दिया है कि विभाग में अब ‘बिज़नेस एज़ यूज़ुअल’ (सामान्य ढर्रा) नहीं चलेगा। अधिकारियों को अब पारदर्शिता और प्रदर्शन (Performance) के कड़े मापदंडों पर खरा उतरना होगा।







