
पिलखाभूमि विश्रामपुर (सूरजपुर) | सरकारी तंत्र में नियम आम आदमी को डराने के लिए होते हैं या कुर्सी पर जमे ‘मठाधीशों’ को हटाने के लिए? छत्तीसगढ़ स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी (CSPTCL) के विश्रामपुर कार्यालय ने स्थानांतरण नीति की ऐसी धज्जियां उड़ाई हैं कि खुद आरटीआई (RTI) के दस्तावेज भी शर्मसार हो जाएं। यहाँ ट्रांसफर सिस्टम पूरी तरह ‘लकवाग्रस्त’ हो चुका है।
‘अंगद’ भी शरमा जाए, ऐसा पैर जमाया है!
विश्रामपुर संभाग के कार्यपालन अभियंता कार्यालय से निकले एक पत्र (दिनांक 25.02.2026) ने यह साबित कर दिया है कि यहाँ कुछ खास चेहरों के लिए नियम मायने नहीं रखते। जब नियमानुसार 3 साल में बोरिया-बिस्तर बंध जाना चाहिए, तब यहाँ के ‘दिग्गज’ एक दशक से ज्यादा समय से कुर्सियों को फेविकोल लगाकर पकड़े हुए हैं।

देखिए इन ‘अमर’ कुर्सियों के दावेदारों को:
श्रीमती राजकुमारी पैंकरा: 2014 से पदस्थ! (12 साल का वनवास यहीं काट रहीं?)
श्री अरुण कुमार बेक: 2014 से डटे हुए हैं! (शायद ऑफिस की चाबियां इन्हीं के पास रहती हैं)
श्री ललित कुमार (कार्यपालन अभियंता): 2018 से जमे हैं! (साहब को कुर्सी से मोह है या काम से?)
श्री कैलाश सिंह और श्री मोहन सिंह: करीब 6 सालों से एक ही मेज की शोभा बढ़ा रहे हैं।
“सवाल मत पूछो, जवाब स्पष्ट नहीं है!”
जब RTI के जरिए इस ‘जमे हुए सिस्टम’ पर सवाल दागे गए, तो विभाग की घबराहट साफ दिखी। जनसूचना अधिकारी ने आधे से ज्यादा सवालों को “प्रश्न अस्पष्ट है” कहकर डस्टबिन में डाल दिया।सबसे मजेदार तो बिंदु क्रमांक 10 है, जहाँ “गोपनीयता” का राग अलापा गया है। सवाल यह है कि बिजली दफ्तर में ऐसी कौन सी ‘परमाणु बम’ की फाइलें रखी हैं जो जनता को नहीं दिखाई जा सकतीं? या फिर इन फाइलों में अपनों के काले कारनामे दफन हैं?
जनता का सीधा प्रहार: क्या ये ‘सिस्टम’ के दामाद हैं
विश्रामपुर की गलियों में अब लोग खुलेआम पूछ रहे हैं कि क्या इन अधिकारियों का ट्रांसफर रोकने के लिए ऊपर से कोई ‘अदृश्य आशीर्वाद’ मिला हुआ है? 12 साल तक एक ही जगह रहने से जो ‘भ्रष्ट नेटवर्क‘ पनपता है, उसका खामियाजा आज विभाग की साख भुगत रही है।
सावधान रहें:अगर आप यहाँ काम कराने जा रहे हैं, तो याद रखिए यहाँ नियम नहीं, बल्कि इन ‘पुराने दिग्गजों’ का अपना संविधान चलता है।
पिलखाभूमि का सीधा सवाल:





