
संपादक मनीष वैद का सीधा प्रहार: साहब! खामोश रहकर चोरी नहीं छुपती हिसाब तो पाई-पाई का देना होगा!
पिलखाभूमि प्रतापपुर/सूरजपुर: सूरजपुर जिले के प्रतापपुर वन विभाग में करोड़ों के ‘नरवा विकास’ कार्यों के गायब रिकॉर्ड्स का मामला अब एक ‘गंभीर सन्नाटे’ में तब्दील हो गया है। ‘पिलखा भूमि’ द्वारा 14 आरटीआई (RTI) के माध्यम से किए गए सनसनीखेज खुलासे को कई दिन बीत चुके हैं, लेकिन विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों ने अब तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। अधिकारियों की यह ‘कुंभकर्णी नींद’ और रहस्यमयी चुप्पी अब जनता के बीच चर्चा का विषय बन चुकी है।
क्या खामोशी ही भ्रष्टाचार की ‘स्वीकारोक्ति’ है?
पत्रकारिता का धर्म निभाते हुए जब ‘पिलखा भूमि’ ने विभाग की पोल खोली, तो उम्मीद थी कि जिम्मेदार सामने आकर सफाई देंगे। लेकिन रेंजर से लेकर डीएफओ (DFO) तक, सभी ने चुप्पी साधी हुई है। सवाल यह है कि:

अगर भ्रष्टाचार नहीं हुआ, तो अधिकारी सामने आकर रिकॉर्ड क्यों नहीं दिखाते?
व्हाट्सएप पर पक्ष मांगने के बाद भी मैसेज ‘सीन’ करके चुप रह जाना क्या यह नहीं दर्शाता कि अफसरों के पास बचाने के लिए कुछ नहीं बचा है?
क्या यह खामोशी इस डर से है कि मुंह खोलते ही भ्रष्टाचार की अगली परत खुल जाएगी?
डीएफओ सूरजपुर की ‘निष्पक्षता’ पर सवाल
पूरे 14 मामलों में प्रथम अपील दायर की जा चुकी है। अब सबकी नजरें डीएफओ सूरजपुर की कुर्सी पर टिकी हैं। अधिकारी की यह चुप्पी अब उनकी निष्पक्षता पर भी सवाल खड़ा कर रही है। क्या वे भी इस तंत्र का हिस्सा बनकर चुप्पी साधे रहेंगे या फिर अपने विभाग में हुए इस ‘रिकॉर्ड गायब’ घोटाले पर कोई साहसिक फैसला लेंगे?

🚨 रायपुर तक गूंजेगी यह ‘खामोशी’
संपादक मनीष वैद ने स्पष्ट कर दिया है कि अधिकारियों की यह चुप्पी उन्हें बचा नहीं पाएगी। कलेक्टर सुरजपुर, वन मंत्री और पीसीसीएफ (PCCF) को दिए जाने वाले आवेदनों में इस ‘मौन’ का भी जिक्र किया जाएगा।
“अफसरों को लगता है कि जवाब न देने से मामला दब जाएगा, लेकिन वे भूल रहे हैं कि कानून में ‘चुप्पी’ का मतलब हमेशा बचाव नहीं होता। अगर रिकॉर्ड ‘निरंक’ हैं और अफसर ‘मौन’ हैं, तो इसका सीधा मतलब है कि दाल में कुछ काला नहीं, बल्कि पूरी दाल ही काली है।”— मनीष वैद, प्रधान संपादक (पिलखा भूमि)
⏳ बने रहें ‘पिलखा भूमि’ के साथ…
प्रतापपुर के जंगलों में दफन यह भ्रष्टाचार अब जल्द ही वन मंत्री और शासन की टेबल पर होगा। अधिकारियों की खामोशी कब तक उनका साथ देती है, यह देखने वाली बात होगी।
अगले अंक में देखिए: रायपुर से जिला प्रशासन तक की घेराबंदी और शिकायतों का पूरा ब्यौरा!





