
संपादक मनीष वैद का आर-पार का ऐलान: 14 प्रथम अपील दायर; अब भ्रष्टाचार की फाइल लेकर रायपुर और जिला प्रशासन कूच करने की तैयारी
पिलखाभूमि प्रतापपुर/सूरजपुर (17 अप्रैल): सूरजपुर जिले के प्रतापपुर वन परिक्षेत्र में ‘नरवा विकास’ के नाम पर हुए कथित करोड़ों के भ्रष्टाचार ने अब एक नया और बेहद गंभीर मोड़ ले लिया है। पिलखा भूमि के प्रधान संपादक मनीष वैद द्वारा लगाए गए कुल 14 आरटीआई (RTI) के जवाब में विभाग ने अपनी ‘लाचारी’ और ‘चोरी’ का जो लिखित प्रमाण दिया है, वह पूरे प्रदेश के प्रशासनिक गलियारे को हिला देने वाला है।
🚫 14 आवेदनों पर ‘जीरो’ रिपोर्ट: रिकॉर्ड जला दिए या कभी बने ही नहीं?
विभाग ने दो चरणों में सूचना देने के नाम पर लोकतंत्र और RTI कानून का मजाक उड़ाया है:
शुरुआती 5 RTI: विभाग ने लिखित में स्वीकार किया कि उनके पास कोई फोटोग्राफ, बिल या मस्टर रोल नहीं है।

शेष 9 RTI: अब बचे हुए 9 आवेदनों पर भी विभाग ने ‘निरंक’ (Zero) जवाब देकर यह सिद्ध कर दिया है कि करोड़ों का भुगतान बिना किसी दस्तावेजी सबूत के कर दिया गया।यानी पूरे 14 के 14 मामलों में विभाग के पास यह बताने के लिए कुछ नहीं है कि जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा किसे दिया गया, काम कहाँ हुआ और उसका भौतिक सत्यापन किसने किया?

⚖️ प्रथम अपील दायर: अब DFO की कोर्ट में होगी सुनवाई
विभाग की इस हठधर्मिता और ‘रिकॉर्ड गायब’ करने की साजिश के खिलाफ मनीष वैद ने कड़ा रुख अपनाते हुए सभी 14 मामलों में प्रथम अपील दायर कर दी है। अब सबकी नजरें डीएफओ (DFO) सूरजपुर पर टिकी हैं। देखना यह होगा कि क्या वे अपने लापरवाह और संदिग्ध मातहतों को बचाते हैं या फिर इस ‘कागजी डकैती’ पर निष्पक्ष न्याय करते हैं।
📂 ‘पिलखा भूमि’ का अगला कदम: रायपुर से जिला प्रशासन तक घेराबंदी
संपादक मनीष वैद ने स्पष्ट कर दिया है कि यह लड़ाई अब केवल पत्राचार तक सीमित नहीं रहेगी। भ्रष्टाचार के इस बड़े पुलिंदे को लेकर कलेक्टर, वन मंत्री और पीसीसीएफ को आवेदन देने की तैयारी जोरों पर है:
कलेक्टर (सूरजपुर): जिले के मुखिया को इस वित्तीय अनियमितता की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच हेतु आवेदन सौंपा जाएगा।
वन मंत्री (छत्तीसगढ़ शासन): प्रदेश के वन मंत्री के पास इस ‘करोड़ों के खेल’ की फाइल पहुंचाई जाएगी, ताकि शासन स्तर पर दोषियों के खिलाफ एफआईआर (FIR) और रिकवरी की कार्रवाई हो सके।
PCCF (रायपुर): विभाग के सर्वोच्च अधिकारी (प्रधान मुख्य वन संरक्षक) को बताया जाएगा कि प्रतापपुर में रिकॉर्ड ‘लापता’ कर भ्रष्टाचार का नया कीर्तिमान रचा जा रहा है।
🤐 सन्नाटे में अधिकारी, सवालों के घेरे में नीयत
व्हाट्सएप पर पक्ष मांगने के बावजूद रेंजर और डीएफओ की चुप्पी यह बता रही है कि उनके पास इस ‘चोरी’ का कोई तकनीकी या कानूनी बचाव नहीं है। करोड़ों की सरकारी राशि का बंदरबांट करना और फिर ‘रिकॉर्ड नहीं है’ का राग अलापना सीधे तौर पर राजकीय कोष के साथ गबन का मामला नजर आता है।

“14 के 14 RTI में ‘निरंक’ जवाब देना विभाग की नीयत को पूरी तरह बेनकाब कर देता है। अगर उनके पास कागज नहीं हैं, तो इसका सीधा मतलब है कि या तो सबूत मिटा दिए गए हैं या काम कभी जमीन पर हुआ ही नहीं। अब कलेक्टर, वन मंत्री और पीसीसीएफ ही तय करेंगे कि इन रिकॉर्ड ‘निगल’ जाने वाले अफसरों की जगह दफ्तर में है या कहीं और।”— मनीष वैद, प्रधान संपादक (पिलखा भूमि)
⚠️ अंतिम चेतावनी: भ्रष्टाचार के आकाओं, अब ‘आगे के अंत’ में आएंगे!
विभाग के वे तमाम जिम्मेदार अधिकारी जो ‘रिकॉर्ड नहीं है’ की आड़ में अपनी गर्दन बचाने की सोच रहे हैं, वे भूल रहे हैं कि पिलखा भूमि की पड़ताल अभी रुकी नहीं है। जो राज फाइलों में दफन किए गए थे, वे अब जन-आंदोलन और उच्च स्तरीय जांच के जरिए बाहर आएंगे। भ्रष्टाचार के ये तमाम चेहरे अब सीधे ‘आगे के अंत’ में आएंगे— जहाँ न तो व्हाट्सएप की चुप्पी काम आएगी और न ही ‘निरंक’ जवाबों का बहाना।
तैयार रहिए, क्योंकि अब इंसाफ की फाइल खुल चुकी है!





