
पिलखाभूमि प्रतापपुर/सूरजपुर | प्रतापपुर वन विभाग में ‘नरवा विकास’ के नाम पर हुए कथित करोड़ों के भ्रष्टाचार का मामला अब ‘चुप्पी’ के घेरे में आ गया है। कल ‘पिलखा भूमि’ द्वारा उजागर किए गए ‘आत्मघाती कबूलनामे’ के बाद, विभाग के जिम्मेदार अधिकारी जवाब देने के बजाय चेहरा छुपाते नजर आ रहे हैं।

व्हाट्सएप पर आधिकारिक पक्ष मांगने पर भी ‘मौन’ रहे अफसर
पत्रकारिता के धर्म का पालन करते हुए संपादक मनीष वैद ने कल रेंजर प्रतापपुर और डीएफओ (DFO) सूरजपुर से व्हाट्सएप के माध्यम से आधिकारिक पक्ष जानने की कोशिश की। मैसेज ‘सीन’ होने के बावजूद अधिकारियों ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। यह मौन चीख-चीख कर कह रहा है कि विभाग के पास करोड़ों के खर्च का कोई ठोस हिसाब नहीं है।

अभी तो सिर्फ झांकी है, 9 RTI का धमाका बाकी है!
विभाग ने 14 में से 5 RTI का जवाब देकर यह तो मान लिया कि उनके पास मस्टर रोल और फोटो नहीं हैं, लेकिन असली ‘भूकंप’ आना अभी बाकी है।

बची हुई 9 फाइलें: इन फाइलों की कानूनी मियाद खत्म होने वाली है।
पार्ट-2 की तैयारी: ‘पिलखा भूमि’ बहुत जल्द उन 9 आवेदनों के राज सार्वजनिक करेगा, जिन्हें विभाग दुनिया से छुपाने की कोशिश कर रहा है।

“जनता की गाढ़ी कमाई का हिसाब तो देना होगा” -मनीष वैद
संपादक मनीष वैद ने तीखे लहजे में कहा— “हमने अफसरों को अपनी बात रखने का पूरा मौका दिया, लेकिन व्हाट्सएप पर उनकी चुप्पी भ्रष्टाचार के संदेह को 100% पुख्ता करती है। 5 RTI ने विभाग की पोल खोल दी है, अब ‘RTI का राज: पार्ट-2’ बहुत जल्द सुर्खियों में होगा। रिकवरी और कार्रवाई तक यह जंग जारी रहेगी।”





