
अम्बिकापुर के हृदय स्थल में ‘मुकेश प्लास्टिक’ की घोर लापरवाही से दहला शहर; संचालक पर FIR दर्ज करने एसपी को सौंपा गया पत्र
अम्बिकापुर | पिलखा भूमि समाचार शहर के व्यस्ततम राम मंदिर रोड स्थित ‘मुकेश प्लास्टिक एवं पटाखा गोदाम’ में लगी भीषण आग ने न केवल करोड़ों की संपत्ति राख कर दी, बल्कि सैकड़ों जिंदगियों को मौत के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया। इस हृदय विदारक घटना ने प्रशासन की नाक के नीचे चल रहे मौत के काले कारोबार की पोल खोल दी है। घनी आबादी के बीच अवैध रूप से बारूद और प्लास्टिक का भंडार करने वाले संचालक की गुंडागर्दी और लापरवाही के खिलाफ अब शहर के जागरूक सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मोर्चा खोल दिया है।

लापरवाही नहीं, यह ‘अक्षम्य अपराध’ है!
अंकुर सिन्हा, सुरेश राम बुनकर, सुजान बिन्द और अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पुलिस अधीक्षक (SP) को सौंपे गए पत्र में कड़े शब्दों में कहा है कि यह महज एक दुर्घटना नहीं, बल्कि व्यावसायिक लाभ के लिए मासूम नागरिकों की जान से खिलवाड़ करने वाला एक अक्षम्य अपराध है।
शिकायती पत्र के मुख्य तीखे बिंदु:
- अवैध भंडारण: रिहायशी इलाके में बिना किसी सुरक्षा मानक और प्रशासन की अनुमति के विस्फोटक पटाखों और जहरीले प्लास्टिक का थोक स्टॉक जमा किया गया था।
- मौत का तांडव: 23 अप्रैल की दोपहर 1 बजे जब आग लगी, तो पटाखों के धमाकों और प्लास्टिक के जहरीले धुएं ने पूरे मोहल्ले में अफरा-तफरी मचा दी। लोग अपनी जान बचाने के लिए बदहवास इधर-उधर भागते रहे।
- चेतावनी को किया अनसुना: मोहल्लेवासियों ने पहले भी इस अवैध गोदाम पर भय व्यक्त किया था, लेकिन संचालक की रसूख के आगे किसी की न चली।

इन धाराओं के तहत कार्रवाई की मांग
सामाजिक कार्यकर्ताओं ने दो टूक शब्दों में संचालक मुकेश के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सख्त धाराओं के तहत FIR दर्ज करने की मांग की है:
- धारा 287: घोर लापरवाही बरतने हेतु।
- धारा 125: नागरिकों के जीवन को संकट में डालने हेतु।
- धारा 199: सार्वजनिक सुरक्षा की गंभीर उपेक्षा।
- विस्फोटक अधिनियम (9B): अवैध बारूद भंडारण।
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल?
राम मंदिर रोड जैसे वीआईपी इलाके में इतना बड़ा अवैध स्टॉक किसके संरक्षण में फल-फूल रहा था? क्या प्रशासन किसी बड़ी जनहानि का इंतजार कर रहा था? सामाजिक कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि यदि संचालक के विरुद्ध तत्काल कठोर दंडात्मक कार्रवाई नहीं हुई, तो वे चुप नहीं बैठेंगे।
“व्यावसायिक मुनाफे के लिए शहरवासियों की जान को दांव पर लगाने वालों को सलाखों के पीछे होना चाहिए। यह आग की लपटें नहीं, प्रशासन की नाकामी का धुआं है।” > — अंकुर सिन्हा व अन्य (सामाजिक कार्यकर्ता)
जांच की प्रक्रिया शुरू, पुलिस प्रशासन का पक्ष: पिलखा भूमि ने इस पूरे मामले की गंभीरता को लेकर पुलिस प्रशासन से संपर्क साधा। पुलिस सूत्रों के अनुसार, सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा सौंपे गए शिकायती पत्र को संज्ञान में ले लिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि अग्निकांड के कारणों और भंडारण की वैधता की तकनीकी जांच की जा रही है। जांच में सुरक्षा मानकों की अनदेखी या अवैध भंडारण की पुष्टि होने पर आरोपी संचालक के विरुद्ध कानून सम्मत कड़ी दंडात्मक कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी। फिलहाल पुलिस हर पहलू पर बारीकी से नजर रखे हुए है।







