कांकेर @ भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा (राज्य शिक्षक सम्मान पुरस्कार)? मेरिट में दूसरा स्थान पाने वाले आदिवासी शिक्षक को दरकिनार कर तीसरे स्थान वाले को उपकृत करने का संगीन आरोप!
01 सितम्बर 2025 (लोक शिक्षण संचालनालय का संदर्भ पत्र)
06 नवम्बर 2025 और 15 नवम्बर 2025 (पीड़ित शिक्षक द्वारा न्याय की गुहार)
आज की दिनांक: 30 मई 2026
पिल्खा भूमिकांकेर/रायपुर: शिक्षा के मंदिर में ईमानदारी और योग्यता को किस कदर ‘षड्यंत्र’ और ‘भेदभाव’ की बलिवेदी पर चढ़ा दिया जाता है, इसका एक जीता-जागता और बेहद शर्मनाक मामला कांकेर जिले से सामने आया है। लोक शिक्षण संचालनालय छत्तीसगढ़, नवा रायपुर द्वारा 01 सितम्बर 2025 को जारी संदर्भ पत्र क्रमांक/शि.क.प्रको./03/राज्यपाल/पुरू./2025/99 के तहत दिए जाने वाले “राज्य शिक्षक सम्मान पुरस्कार 2025-26” पर भ्रष्टाचार और पक्षपात के गंभीर आरोप लगे हैं।
पूरा मामला आरटीआई (RTI) से मिली जानकारी के बाद खुला है, जिसने जिला स्तरीय चयन समिति (DSC) कांकेर के फैसले को पूरी तरह कटघरे में खड़ा कर दिया है।
बड़ा खुलासा: मेरिट में नंबर 2 को ‘आउट’, नंबर 3 को ‘इन’ करने का खेल!
शासकीय हाईस्कूल अनूपपुर (पी.व्ही. 127), विकासखंड कोयलीबेड़ा (जिला उत्तर बस्तर कांकेर) में पदस्थ व्याख्याता श्री दामेसाय बघेल ने प्रदेश के मुखिया और स्कूल शिक्षा मंत्री के सामने दस्तावेजों के साथ सीधे तौर पर साजिश का आरोप लगाया है।
सहायक जनसूचना अधिकारी, जिला शिक्षा अधिकारी उ.ब. कांकेर से सूचना के अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त जानकारी के मुताबिक:
जिला स्तरीय चयन समिति (DSC) कांकेर की वरिष्ठता सूची में श्री दामेसाय बघेल ने 72/100 अंक पाकर दूसरा (द्वितीय) स्थान प्राप्त किया था। नियमानुसार वे इस सम्मान के सीधे हकदार थे।
लेकिन, कथित तौर पर एक गहरी प्रशासनिक साजिश और सांठगांठ के तहत, वरिष्ठता सूची में 71/100 अंक पाकर तीसरे स्थान पर रहने वाले शिक्षक (श्री बोधन लाल साहू, शिक्षक शा.पूर्व मा. शा. चिंऔरी, विकास खण्ड-चारामा) का नाम राज्य स्तर पर पुरस्कार के लिए भेजकर उन्हें उपकृत कर दिया गया।
आदिवासी और सुदूर अंचल का होने का मिला ‘पुरस्कार’?
पीड़ित शिक्षक श्री दामेसाय बघेल, जो कि हल्बा जनजाति (अनुसूचित जनजाति) से आते हैं और 27 फरवरी 1989 से सुदूर वनांचल क्षेत्र में पूरी निष्ठा के साथ शैक्षणिक, सांस्कृतिक और सामाजिक विकास में अपना अमूल्य योगदान दे रहे हैं, उन्होंने अपनी शिकायत में बेहद भावुक और तीखा दर्द बयां किया है।
उन्होंने अपने हस्ताक्षरित आवेदनों (दिनांक 06 नवंबर 2025 को स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेन्द्र यादव और दिनांक 15 नवंबर 2025 को माननीय मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय व सांसद श्री भोजराज नाग को प्रेषित) में सीधे तौर पर कहा है:
“ऐसा प्रतीत होता है कि मैं अनुसूचित जनजाति वर्ग का हूँ तथा सुदूर अंचल में कार्यरत हूँ, इसलिए मेरे साथ ऐसा छल किया जा रहा है। इस भेदभाव से मैं मानसिक रूप से व्यथित हूँ।”
इस गंभीर मामले में अखिल भारतीय हल्बा समाज ने भी नाराजगी जताते हुए पत्र को अग्रसारित किया है और मामले में कड़ा विरोध दर्ज कराया है।
मुख्यमंत्री के ‘सुशासन’ और ‘आवेदन पर त्वरित कार्रवाई’ के दावों की परीक्षा!
एक तरफ जहां प्रदेश में माननीय मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय जी के नेतृत्व में ‘सुशासन का दौर’ चल रहा है, वहीं दूसरी तरफ निचले स्तर पर बैठे कुछ जिम्मेदार अधिकारी इस सुशासन की छवि को धूमिल करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। मुख्यमंत्री जी का स्पष्ट निर्देश है कि जनता और कर्मचारियों के आवेदनों पर त्वरित और न्यायसंगत कार्रवाई होनी चाहिए।
जब पीड़ित शिक्षक ने 15 नवम्बर 2025 को सीधे मुख्यमंत्री सचिवालय और स्कूल शिक्षा मंत्री को आवेदन सौंपकर उच्च स्तरीय जांच की मांग की थी, तो सुशासन के संकल्प के तहत अब तक दोषियों पर गाज गिर जानी चाहिए थी। लेकिन नवंबर 2025 से लेकर आज 30 मई 2026 तक, महीनों बीत जाने के बाद भी फाइल का आगे न बढ़ना शासन की ‘त्वरित कार्रवाई’ के दावों पर सवालिया निशान लगाता है।
‘पिल्खा भूमि’ की तीखी टिप्पणी
“यह सुशासन का त्यौहार है या कूटनीति का अंधकार?” जिला चयन समिति कांकेर के बंद कमरों में अंकों का जो ‘अदृश्य खेल’ खेला गया, उसने यह साबित कर दिया है कि वनांचल में ईमानदारी से खड़िया घिसने वाले आदिवासी शिक्षकों की पीठ थपथपाने के बजाय, उनके हक को छीनना ज्यादा आसान है। जब 72 अंक पाने वाला योग्यता की कतार में बाहर खड़ा कर दिया जाए और 71 अंक वाला ‘पुरस्कृत’ होकर मुस्कुराए, तो समझ जाना चाहिए कि व्यवस्था में ‘घुन’ लग चुका है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय जी खुद आदिवासी समाज के गौरव हैं और जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रहे हैं। ‘पिल्खा भूमि’ प्रशासन से सीधे सवाल करता है कि आखिर सुदूर क्षेत्र में सेवा देने वाले इस शिक्षक के हस्ताक्षरित आवेदन पर आज 30 मई 2026 तक कोई निर्णायक, कठोर और त्वरित कार्रवाई क्यों नहीं हुई? जांच के नाम पर ढुलमुल रवैया अपनाकर किसे बचाने की कोशिश की जा रही है? इस ‘पुरस्कार घोटाले’ की परतें उधेड़ना सुशासन सरकार की साख के लिए अब बेहद जरूरी हो चुका है।
– विशेष ब्यूरो रिपोर्ट, पिल्खा भूमि
‘पिल्खा भूमि’ सत्यापन नोट
“हम तथ्यों पर बात करते हैं, दावों पर नहीं।” यह समाचार पूरी तरह प्रामाणिक और आधिकारिक दस्तावेजों पर आधारित है। खबर में उल्लेखित प्राप्तांक (72/100 और 71/100) स्वयं जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय उत्तर बस्तर कांकेर द्वारा सूचना के अधिकार (RTI) के तहत लिखित में प्रदान किए गए हैं। इसके अलावा पीड़ित शिक्षक द्वारा मुख्यमंत्री, स्कूल शिक्षा मंत्री और सांसद को सौंपे गए हस्ताक्षरित आवेदनों की अधिकृत पावती (फाइल नाम: 1000363407.jpg और 1000363409.jpg) संस्थान के पास सुरक्षित है। ‘पिल्खा भूमि’ पूरी जिम्मेदारी के साथ तथ्यों की सत्यता की पुष्टि करता है।