
पिलखा भूमि ब्यूरो, बलरामपुर
जंगल और सरकारी जमीन को अपनी बपौती समझने वाले वन माफियाओं के खिलाफ प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। वनमंडलाधिकारी (DFO) आलोक वाजपेयी के कड़े और सख्त रुख के बाद वन विभाग, राजस्व और पुलिस की संयुक्त टीम ने मिलकर धामनी वन परिक्षेत्र के नवाडीह (अन्नपारा बीट) अंतर्गत आने वाले ग्राम गाजर में एक तगड़ा बेदखली अभियान चलाया। इस अचानक गरजे पीले पंजे से पूरे इलाके के वन माफियाओं में हड़कंप मच गया है।
3.851 हेक्टेयर की कीमती वन भूमि हुई आजाद
मिली जानकारी के अनुसार, प्रशासन ने कुल 34 अतिक्रमण के मामलों में से हाईकोर्ट में चल रहे 3 मामलों को छोड़कर बाकी सभी 31 अवैध कब्जों पर सीधे बुल्डोजर चला दिया। इस कार्रवाई के तहत वन भूमि पर अवैध रूप से बनाए गए पक्के-कच्चे मकानों को पूरी तरह जमींदोज कर दिया गया, जिससे लगभग 3.851 हेक्टेयर बहुमूल्य वन भूमि भू-माफियाओं के चंगुल से मुक्त करा ली गई है।
अचानक नहीं हुई कार्रवाई, पहले मिला था मौका
प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, यह कार्रवाई रातों-रात नहीं की गई है। भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 80(A) के तहत सभी अवैध कब्जाधारियों को पहले बाकायदा कानूनी नोटिस जारी किए गए थे। उन्हें खुद से कब्जा हटाने का पर्याप्त समय और मौका भी दिया गया था। जब तय समय सीमा के भीतर उन्होंने जगह खाली नहीं की, तब जाकर विधिक प्रक्रिया पूरी करते हुए प्रशासन का पीला पंजा चला।
अब ‘हरी-भरी’ होगी कब्जा मुक्त हुई जमीन
इस पूरी कार्रवाई का सबसे बेहतरीन पहलू यह है कि अब इस मुक्त कराई गई भूमि को खाली नहीं छोड़ा जाएगा। ‘वन बचाओ, पर्यावरण सजाओ’ अभियान के तहत आने वाले मानसून (वर्षा ऋतु) में स्थानीय ग्राम पंचायत, जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों की मदद से यहाँ व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण (वन महोत्सव) किया जाएगा, ताकि उजाड़े गए जंगल का स्वरूप वापस लौट सके।
मौके पर डटा रहा भारी प्रशासनिक अमला
कार्रवाई के दौरान किसी भी विरोध से निपटने के लिए मौके पर भारी प्रशासनिक फौज तैनात थी। इसमें रामानुजगंज के अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), अनुविभागीय अधिकारी (पुलिस), वाड्रफनगर के उप वनमंडलाधिकारी, रामानुजगंज व रामचंद्रपुर के तहसीलदार सहित विभिन्न क्षेत्रों के वन कर्मचारी, सुरक्षा श्रमिक और ग्राम गाजर के सरपंच, पंच व बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
DFO की कड़ी चेतावनी: कार्रवाई के बाद वनमंडलाधिकारी आलोक वाजपेयी ने साफ लफ्जों में चेतावनी दी है कि वनों को नुकसान पहुंचाने वाले, अवैध कटाई, अवैध चराई या वन्यजीवों से जुड़े अपराधों को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। भविष्य में भी ऐसी सख्त और ताबड़तोड़ कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।
📰 संपादकीय टिप्पणी (पिलखा भूमि की कलम से)
संपादकीय: जब नीयत साफ हो, तो बुल्डोजर भी सही दिशा में चलता है!
बलरामपुर वनमंडल के धामनी परिक्षेत्र में प्रशासन ने जिस तरह का कड़ा रुख अपनाया है, वह केवल एक ‘अतिक्रमण हटाओ अभियान’ नहीं, बल्कि उन रसूखदारों और भू-माफियाओं के गाल पर करारा तमाचा है जो सरकारी जमीन और जंगलों को अपनी निजी जागीर समझ बैठे थे। 31 अवैध पक्के और कच्चे मकानों को मलबे में तब्दील कर लगभग पौने चार हेक्टेयर की कीमती वन भूमि को आज़ाद कराना यह साबित करता है कि अगर प्रशासनिक नीयत साफ हो और नेतृत्व में इच्छाशक्ति हो, तो कोई भी रसूखदार कानून से ऊपर नहीं हो सकता। DFO आलोक वाजपेयी और उनकी संयुक्त टीम की यह कार्रवाई वाकई काबिले-तारीफ है।
लेकिन, इस पूरी कार्रवाई का सबसे खूबसूरत और जरूरी पहलू यह है कि प्रशासन इस जमीन को सिर्फ खाली कराकर नहीं छोड़ रहा, बल्कि मानसून में यहाँ व्यापक वृक्षारोपण की तैयारी है। उजाड़े गए जंगलों को फिर से हरा-भरा करना ही इस बेदखली अभियान की असली जीत होगी।
‘पिलखा भूमि’ इस कार्रवाई का स्वागत करती है, लेकिन साथ ही प्रशासन को यह आगाह भी करना चाहती है कि यह मुस्तैदी केवल एक दिन के ‘सिनेमैटिक एक्शन’ तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। वन अपराध, अवैध कटाई और वन्यजीवों की तस्करी पर यह चोट निरंतर जारी रहनी चाहिए। जब तक हर छोटे-बड़े वन माफिया के मन में कानून का यह खौफ परमानेंट नहीं बैठ जाता, तब तक जंगलों की सुरक्षा अधूरी है। उम्मीद है, बलरामपुर की यह धमक पूरे प्रदेश के वन अमले के लिए एक मिसाल बनेगा।







