
पिलखाभूमि रायपुर। छत्तीसगढ़ में कक्षा 6वीं से लेकर 10वीं तक संस्कृत विषय को पुनः अनिवार्य विषय के रूप में शामिल करने की मांग ने जोर पकड़ लिया है। इस संबंध में ‘छत्तीसगढ़ संस्कृत शिक्षक संघ’ द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। संघ के पदाधिकारियों ने स्कूल शिक्षा मंत्री और लोक शिक्षण संचालनालय के संचालक को औपचारिक पत्र सौंपकर जल्द से जल्द शासकीय आदेश (श्वेत-पत्र) जारी करने का आग्रह किया है।
शिक्षा मंत्री की घोषणा को अमलीजामा पहनाने की अपील
संघ के प्रदेश अध्यक्ष दौलत राम साहू के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापनों में इस बात का प्रमुखता से उल्लेख किया गया है कि बीते 30 अप्रैल को छत्तीसगढ़ संस्कृत विद्यामण्डलम्, रायपुर के परीक्षा परिणाम घोषणा के अवसर पर तथा विधानसभा में माननीय स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेन्द्र यादव जी द्वारा संस्कृत विषय को अनिवार्य करने की ऐतिहासिक घोषणा की गई थी।

शिक्षक संघ ने इस फैसले का पुरजोर स्वागत करते हुए इसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 की मूल भावना के अनुरूप और भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल संस्कृत भाषा के सम्मान में एक बड़ा कदम बताया है।

मंत्रालय से लेकर संचालनालय तक की गई पैरवी
10 मई 2026: संघ के पदाधिकारियों ने नवा रायपुर स्थित शिक्षा मंत्री के निवास पर उनसे प्रत्यक्ष मुलाकात कर एक आवेदन सौंपा था, जिस पर मंत्री जी ने जल्द कार्रवाई का आश्वासन दिया था।

20 मई 2026: संघ द्वारा पुनः स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेन्द्र यादव जी और संचालक (लोक शिक्षण संचालनालय, इंद्रावती भवन, अटल नगर) को पत्र लिखकर मांग की गई है कि इस घोषणा को मूर्त रूप देते हुए शीघ्र-अतिशीघ्र आधिकारिक शासकीय आदेश जारी किया जाए।

संस्कृत शिक्षकों में हर्ष, आदेश का इंतजार
छत्तीसगढ़ संस्कृत शिक्षक संघ के पदाधिकारियों—प्रदेश अध्यक्ष दौलत राम साहू, शिरीष श्रीवास्तव, और दीनबन्धु वाघ (व्याख्याता, संस्कृत) समेत प्रदेश के तमाम संस्कृत शिक्षकों का कहना है कि यह निर्णय राज्य में सांस्कृतिक और भाषाई धरोहर को मजबूत करेगा। अब संघ और शिक्षकों को शासन स्तर से औपचारिक आदेश (नोटिफिकेशन) जारी होने का बेसब्री से इंतजार है, ताकि आगामी सत्र से इसे पूरी तरह लागू किया जा सके।













