
ग्राउंड रिपोर्टिंग के आगे झुका अमला— विभाग ने मीडिया के लिए जारी किया आधिकारिक पक्ष; माना— चांदी के दाम बढ़ने के कारण बांटे गए थे ‘कृत्रिम’ (नकली) मंगलसूत्र!
पिलखा भूमि/खड़गवां मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत खड़गवां विकासखंड के चनवारीडांड में बांटे गए नकली मंगलसूत्र को लेकर ‘पिलखा भूमि’ द्वारा प्रमुखता से उठाए गए मुद्दे पर शासन और प्रशासन स्तर पर भारी हड़कंप मच गया है। आज सुबह पीड़ित नववधू संजना दयाल के वीडियो साक्ष्य के साथ पब्लिश की गई ‘पिलखा भूमि’ की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट का यह सीधा और बड़ा असर है कि महिला एवं बाल विकास विभाग को आनन-फानन में मीडिया के लिए अपना तथ्यात्मक स्पष्टीकरण (सफाई स्क्रिप्ट) जारी करना पड़ा है।
विभागीय अधिकारियों ने अपनी इस सफाई स्क्रिप्ट में ऑन-रिकॉर्ड यह बड़ी बात कबूल कर ली है कि चांदी के बाजार मूल्य बढ़ने के कारण स्वीकृत प्रावधानों के अनुरूप ही जोड़ों को ‘कृत्रिम’ (आर्टिफिशियल/नकली) मंगलसूत्र वितरित किए गए थे।
📊 विभाग की सफाई: आंकड़े और दलीलें
मीडिया के लिए जारी विभागीय स्क्रिप्ट के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
184 जोड़ों का विवाह: अधिकारियों के अनुसार, 10 फरवरी 2026 को चनवारीडांड (खड़गवां) में आयोजित सामूहिक विवाह कार्यक्रम में कुल 184 जोड़ों का विवाह कराया गया था।

सप्लायर फर्म पर कार्रवाई का दावा: सामग्री की गुणवत्ता में कमी पाए जाने की बात स्वीकार करते हुए विभाग का दावा है कि उन्होंने संबंधित सप्लायर फर्म पर प्रति हितग्राही 100 रुपये की दर से कुल 18,400 रुपये की कटौती की है।
बजट का गणित: विभाग ने बताया कि योजना के तहत प्रति कन्या 50 हजार रुपये की सहायता का प्रावधान है, जिसमें से 35 हजार रुपये डीबीटी (DBT) के माध्यम से सीधे बैंक खातों में भेजे जाते हैं। शेष राशि में से प्रति कन्या 1,000 रुपये सीधे खातों में जमा किए गए और लगभग 14 हजार रुपये विवाह आयोजन व अन्य व्यवस्थाओं पर खर्च हुए।
🔥 पिलखा भूमि की कड़क टिप्पणी (संपादकीय दृष्टिकोण)
“सिर्फ ‘सफाई स्क्रिप्ट’ जारी करने से काम नहीं चलेगा… पिलखा भूमि पूछता है कि क्या गरीब बेटियों के आत्मसम्मान की कीमत सिर्फ 100 रुपये का जुर्माना है?”

‘पिलखा भूमि’ महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा तत्परता से जारी किए गए इस ‘तथ्यात्मक पक्ष’ का संज्ञान लेता है। इससे यह तो शीशे की तरह साफ हो गया कि सरकार के कानों तक पीड़ित बेटियों की आवाज पहुँच चुकी है और विभाग ने भी यह मान लिया है कि वितरित किए गए मंगलसूत्र ‘कृत्रिम’ यानी नकली थे।
लेकिन, ‘पिलखा भूमि’ जनहित में शासन और खड़गवां के स्थानीय जिम्मेदार अधिकारियों से ये 4 कड़े सवाल पूछता है:
1. क्या बजट की कमी का बहाना जायज है?: विभाग की दलील है कि चांदी के दाम बढ़ने के कारण कृत्रिम (नकली) मंगलसूत्र दिए गए। सवाल यह उठता है कि क्या छत्तीसगढ़ की गरीब बेटियों के सुहाग का बजट चांदी की कीमतों के भरोसे तय होगा? जब योजना का नाम ‘मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना’ है, तो क्या बेटियों को सुहाग के प्रतीक के रूप में गिलट या लोहे का मंगलसूत्र थमा देना हमारी गौरवशाली संस्कृति और मर्यादा के अनुकूल है?
2. 100 रुपये की कटौती ऊँट के मुँह में जीरा क्यों?: गड़बड़ी करने वाली फर्म पर प्रति हितग्राही मात्र 100 रुपये की कटौती का दावा करके विभाग ने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला तो झाड़ लिया, लेकिन जिन नववधुओं का मंगलसूत्र पहनने के कुछ ही दिनों भीतर पूरी तरह काला पड़ गया, उनके मन और विश्वास को जो ठेस पहुँची, उसकी भरपाई इस मामूली कटौती से कैसे होगी?

3. स्थानीय मैदानी अधिकारियों ने पहले सुध क्यों नहीं ली?: रायपुर मुख्यालय के नाम से यह स्क्रिप्ट तब जारी होती है जब ‘पिलखा भूमि’ इस जनता से जुड़े गंभीर मुद्दे को पूरी ताकत से उठाता है। चनवारीडांड के स्थानीय मैदानी अधिकारी और भौतिक सत्यापन (Verification) करने वाले जिम्मेदार अफसर अब तक इस मामले पर पर्दा क्यों डाले हुए थे? उन्होंने समय रहते इसकी रिपोर्ट उच्च अधिकारियों और माननीय मंत्री जी को क्यों नहीं भेजी?
4. केवल कागजी बयान या कड़ा आदेश?: विभाग ने मीडिया में केवल एक स्क्रिप्ट (बयान) जारी किया है, लेकिन इस भ्रष्टाचार के खिलाफ सप्लायर को ब्लैकलिस्ट करने या दोषी अधिकारियों को सस्पेंड करने का कोई आधिकारिक कड़ा आदेश अब तक धरातल पर सामने नहीं आया है।
हमारा अंतिम रुख:
‘पिलखा भूमि’ हमेशा से शासन की जनहितैषी नीतियों और माननीय मंत्री जी की साफ-सुथरी छवि का समर्थक रहा है। हमारा मकसद व्यवस्था को बदनाम करना नहीं, बल्कि उन भ्रष्ट सप्लायरों और लापरवाह स्थानीय अधिकारियों को बेनकाब करना है जो नीचे बैठकर संवेदनशील योजनाओं को दीमक की तरह चाट रहे हैं। विभाग ने मीडिया में बयान जारी कर अपनी गलती तो मान ली है, लेकिन हमारी मांग है कि ऐसे संवेदनशील मामले में केवल कागजी स्क्रिप्ट काफी नहीं है। बेटियों के सम्मान के लिए इस पूरे टेंडर प्रक्रिया और स्थानीय अधिकारियों की भूमिका की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए और सख्त प्रशासनिक आदेश जारी होने चाहिए।— मनीष वैद्य (प्रधान संपादक, पिलखा भूमि)




