
महिला एवं बाल विकास मंत्री की संवेदनशील नीतियों को नीचे बैठे जिम्मेदार लगा रहे पलीता; नववधुओं का फूटा गुस्सा, सप्लायर और अधिकारियों की जुगलबंदी पर उठ रहे सवाल।
(ब्यूरो, पिलखा भूमि):महिला एवं बाल विकास मंत्री की प्राथमिकताओं और उनकी अत्यंत संवेदनशील महत्वाकांक्षी योजनाओं को जमीनी स्तर पर पलीता लगाने का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत खड़गवां (चंदवाड़ीदार) क्षेत्र में संपन्न हुए सामूहिक विवाह कार्यक्रम में नीचे बैठे स्थानीय अधिकारियों और ठेकेदारों की घोर लापरवाही उजागर हुई है। योजना की एक नववधू लाभार्थी, संजना दयाल ने सोशल मीडिया पर वीडियो साक्ष्य जारी कर सीधे विभागीय अमले की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
संजना दयाल और उनके साथ खड़ी अन्य नवविवाहित युवतियों का आरोप है कि सामूहिक विवाह के पावन मंच पर उन्हें सरकार की तरफ से जो मंगलसूत्र भेंट किए गए थे, वे शुद्ध धातु के न होकर बेहद घटिया दर्जे की ‘गिलट’ (नकली धातु) से निर्मित हैं। वीडियो के वायरल होते ही प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है। जानकार मानते हैं कि यह सीधे तौर पर जमीनी स्तर के अधिकारियों द्वारा निविदा (टेंडर) प्रक्रिया और सामग्री के सत्यापन (वेरिफिकेशन) में बरती गई भारी लापरवाही या सांठगांठ का नतीजा है, जिससे सीधे तौर पर विभाग और सरकार की छवि धूमिल करने की कोशिश की गई है।

वीडियो में पीड़ित नववधू संजना दयाल का पूरा बयान:
“हमारा विवाह मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत बीती 10 फरवरी 2026 को चंदवाड़ीदार / खड़गवां में हुआ था। जब हम शादी में मिले इस मंगलसूत्र को पहन रहे थे, तो यह पूरा काला पड़ गया। इसके बाद हम लोगों ने सोचा कि क्यों न इसकी शुद्धता की जांच करवा ली जाए, तब जाकर इस जालसाजी का पता चला। हमें योजना के नाम पर जो मंगलसूत्र दिया गया, वह पूरी तरह से नकली (गिलट का) है। शासन स्तर से तो हमारी खुशियों के लिए पूरा बजट जारी किया जाता है, लेकिन धरातल पर बैठे कुछ लोग हमारे सौभाग्य के इस पवित्र प्रतीक के साथ ऐसा मजाक कर रहे हैं। इस मामले की जांच होनी चाहिए।”
संदेह के घेरे में स्थानीय अधिकारी:
नियमों के मुताबिक, सामूहिक विवाह के दौरान बांटे जाने वाले उपहारों और आभूषणों की गुणवत्ता जांचने की पूरी जिम्मेदारी स्थानीय स्तर के सत्यापन अधिकारियों की होती है। बिना उनकी मंजूरी के कोई भी सामग्री वितरित नहीं की जा सकती। ऐसे में शादी के महज कुछ ही महीनों के भीतर मंगलसूत्र का पूरी तरह काला पड़ जाना यह साबित करता है कि खड़गवां के स्थानीय जिम्मेदार अधिकारियों ने बिना जांच किए सप्लायर को फायदा पहुंचाने के लिए आंखें मूंद लीं। इस घटना के बाद पीड़ित परिवारों में स्थानीय प्रशासन के खिलाफ भारी रोष देखा जा रहा है।

संपादकीय टिप्पणी (पिलखा भूमि दृष्टिकोण)
“मंत्री जी की साख से खिलवाड़ कर रहे जमीनी अधिकारी”
मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना समाज के निर्धन परिवारों की बेटियों को ससम्मान विदा करने के उदात्त और पवित्र उद्देश्य से बनाई गई है। महिला एवं बाल विकास मंत्री स्वयं महिलाओं के आत्मसम्मान और उनकी गरिमा को लेकर बेहद संवेदनशील रही हैं, और राज्य स्तर से इस योजना के सुचारू संचालन के लिए कड़े निर्देश भी जारी किए गए हैं। परंतु, खड़गवां से आई यह तस्वीर यह बताने के लिए काफी है कि विभाग के भीतर नीचे बैठे कुछ लापरवाह अधिकारी और लालची ठेकेदार किस कदर मंत्री जी की साख को बट्टा लगाने पर आमादा हैं।

10 फरवरी 2026 को ब्याही गईं गरीब बेटियों के मंगलसूत्र का काला पड़ना कोई आम बात नहीं है। मंगलसूत्र केवल कोई आभूषण नहीं, बल्कि भारतीय नारी के अखंड सौभाग्य और उसकी सामाजिक मर्यादा का सर्वोच्च प्रतीक है। ऐसे संवेदनशील विषय पर स्थानीय स्तर पर इतनी बड़ी लापरवाही अक्षम्य है। विज्ञापनों और नीतियों की चमक को नीचे बैठा अमला अपने भ्रष्टाचार से धुंधला कर रहा है।

‘पिलखा भूमि’ को पूरा विश्वास है कि संवेदनशील महिला एवं बाल विकास मंत्री इस गंभीर मामले का तत्काल संज्ञान लेंगी। इस पूरे आभूषण घोटाले के पीछे छिपे वास्तविक दोषियों, सप्लायरों और उन पर आंखें मूंदकर बैठने वाले स्थानीय अधिकारियों को चिन्हित कर उनके खिलाफ तत्काल ऐसी कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी, जो पूरे सूबे के लिए एक नजीर बने। गरीब बेटियों के हक और सौभाग्य पर डाका डालने वाले इन दीमकों को व्यवस्था से बाहर करना बेहद जरूरी है।— संपादक (पिलखा भूमि)










