
प्रतापपुर (सूरजपुर) | पिलखा भूमि ब्यूरो
शासकीय कालिदास महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं के लिए एक सुखद खबर है। पिछले कई महीनों से भीषण जल संकट से जूझ रहे इस संस्थान में अब प्यास बुझाने का इंतजाम शुरू हो गया है। छात्र संगठन NSUI की आक्रामक रणनीति और लगातार दी गई चेतावनियों के बाद प्रशासन ने घुटने टेक दिए हैं और महाविद्यालय परिसर में बोर खनन (बोरिंग) का कार्य युद्धस्तर पर प्रारंभ कर दिया गया है।

छात्रों के सब्र का बांध टूटा, तो हरकत में आया विभाग
बता दें कि कालिदास कॉलेज में लंबे समय से पीने के पानी की बूंद-बूंद के लिए छात्र तरस रहे थे। दूर-दराज से आने वाले विद्यार्थियों को पढ़ाई छोड़कर पानी के लिए भटकना पड़ता था। इस जनहितैषी मुद्दे को NSUI के ब्लॉक अध्यक्ष विनय चौधरी ने पूरी मजबूती के साथ उठाया। संगठन ने दो टूक शब्दों में प्रशासन को अल्टीमेटम दिया था कि यदि मूलभूत सुविधाएं नहीं मिलीं, तो चक्काजाम और उग्र प्रदर्शन होगा।
विनय चौधरी ने कहा- ‘यह तो बस शुरुआत है
‘बोरिंग कार्य शुरू होने पर विनय चौधरी ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि छात्रों का हक छीनने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने साफ लहजे में कहा— “प्रशासन ने पेयजल की मांग मान ली है, यह छात्रों की जीत है। लेकिन अभी लड़ाई अधूरी है। जर्जर भवन और बाउंड्रीवाल की मरम्मत के बिना छात्र खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।”

पिलखा भूमि की नजर: अभी कई सवाल बाकी हैं
भले ही पेयजल की समस्या पर काम शुरू हो गया है, लेकिन पिलखा भूमि प्रशासन से यह सवाल पूछता है कि क्या कॉलेज की अन्य बदहाल व्यवस्थाओं के लिए भी किसी बड़े आंदोलन का इंतजार किया जाएगा?
क्या जर्जर भवन की सुध ली जाएगी?
शौचालयों की गंदगी और टूटी बाउंड्रीवाल कब ठीक होगी?
चेतावनी: NSUI ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर बाकी मांगों पर 7 दिनों के भीतर कार्रवाई की रूपरेखा तैयार नहीं हुई, तो कॉलेज गेट पर ताला जड़कर बड़ा आंदोलन छेड़ा जाएगा।
छात्रों की आवाज, पिलखा भूमि के साथ।







