
पिलखाभूमि बलरामपुर।
छत्तीसगढ़ शासन में पारदर्शिता और सुशासन का दावा करने वाली सरकार के दावों की पोल खुद कृषि मंत्री के गृह क्षेत्र बलरामपुर में ही खुलती नजर आ रही है। यहाँ का उप संचालक कृषि (DDA) कार्यालय ‘सूचना के अधिकार’ (RTI) जैसे महत्वपूर्ण संवैधानिक कानून को ठेंगे पर रख रहा है। चौंकाने वाला तथ्य यह है कि निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बाद भी न तो जानकारी दी गई और न ही जिम्मेदार अधिकारी फोन उठाकर जवाब देना उचित समझ रहे हैं।
मंत्री की साख पर भारी पड़ रहे निरंकुश अधिकारी
बलरामपुर क्षेत्र के लिए यह गौरव की बात है कि यहाँ का प्रतिनिधित्व स्वयं प्रदेश के कृषि मंत्री कर रहे हैं। लेकिन, विडंबना देखिए कि उन्हीं के विभाग के अधिकारी अपनी मनमानी से सरकार की छवि धूमिल करने में तुले हैं। उप संचालक कृषि कार्यालय में RTI आवेदनों पर 30 दिन की वैधानिक समय-सीमा बीत जाने के बाद भी विभाग का ‘मौन’ रहना यह संकेत देता है कि यहाँ अधिकारियों को न तो कानून का भय है और न ही शासन के अनुशासन का।
फोन न उठाना: क्या यह प्रशासनिक शिष्टाचार का उल्लंघन नहीं?
खबर की गंभीरता तब और बढ़ जाती है जब इस संबंध में जानकारी लेने हेतु उप संचालक कृषि को बार-बार फोन किया गया। लेकिन साहब अपनी ही दुनिया में इतने मग्न हैं कि उन्होंने जनता के प्रति अपनी जवाबदेही को दरकिनार कर फोन उठाना भी जरूरी नहीं समझा। शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि अधिकारी जन-प्रतिनिधियों और जनता के फोन रिसीव करें, लेकिन यहाँ तो ‘सैंया भए कोतवाल, अब डर काहे का’ वाली स्थिति बनी हुई है। अधिकारियों का यह अहंकारी रवैया सीधे तौर पर मुख्यमंत्री के निर्देशों की अवहेलना है।

“चोर की दाढ़ी में तिनका” या गहरे भ्रष्टाचार का संकेत?
आखिर उप संचालक कृषि कार्यालय के पास छिपाने के लिए ऐसा क्या है जो सूचना देने से कतराया जा रहा है? सरकारी तंत्र में यह कहावत मशहूर है कि “चोर की दाढ़ी में तिनका”, और यहाँ विभाग की चुप्पी कुछ इसी ओर इशारा कर रही है। जनता के टैक्स के पैसे से होने वाले विकास कार्यों का हिसाब देने में यह हिचकिचाहट कई सवाल खड़े करती है। क्या विभाग के भीतर किसी बड़ी गड़बड़ी को संरक्षण दिया जा रहा है? जब मंत्री के अपने क्षेत्र में विभाग के दरवाजे सूचना के लिए बंद हो जाएं, तो पारदर्शिता के दावे खोखले नजर आते हैं।
आने वाले अंकों में होगा बड़ा खुलासा: रडार पर हैं अन्य विभाग!
यह तो सिर्फ शुरुआत है। ‘पिल्खा भूमि न्यूज़’ की पड़ताल अभी रुकी नहीं है। हमारे पास पुख्ता जानकारी है कि सिर्फ कृषि विभाग ही नहीं, बल्कि जिले के अन्य कई विभागों में भी RTI कानून की धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं। आने वाले अंकों में हम सिलसिलेवार तरीके से खुलासा करेंगे कि कैसे अन्य विभागों में भी फाइलों को दबाया जा रहा है। शासन की आँखों में धूल झोंकने वाले हर विभाग की पोल जल्द ही जनता के सामने खुलेगी।
अब होगी सीधे शासन स्तर पर शिकायत
इस प्रशासनिक लापरवाही और तानाशाही को लेकर अब मामला तूल पकड़ता नजर आ रहा है। आवेदकों द्वारा न केवल राज्य सूचना आयोग में शिकायत की तैयारी की जा रही है, बल्कि इस पूरे मामले के साक्ष्य (Call Logs और RTI रसीद) सीधे राजभवन और मुख्यमंत्री सचिवालय को भेजने का निर्णय लिया गया है।
निष्कर्ष: अधिकारियों की यह बेरुखी सीधे तौर पर शासन की छवि को जनता के बीच खराब कर रही है। यदि मंत्री जी के अपने क्षेत्र में उप संचालक कृषि स्तर के अधिकारी इस कदर बेलगाम हैं, तो पूरे प्रदेश में RTI की क्या स्थिति होगी, इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।






