
पिलखा भूमि बलरामपुर: क्षेत्र में सूचना के अधिकार (RTI) अधिनियम का मखौल उड़ाने और सफल कूरियर डिलीवरी के बाद भी ‘शासकीय स्मरण पत्र’ प्राप्त न होने का खोखला दावा करने वाले मामले में विधिक कार्रवाई की तैयारी अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस पूरे मामले में स्थानीय स्तर पर रिकॉर्ड छिपाने की गंभीर आशंका बनी हुई है।
विश्वस्त सूत्रों का कहना है कि समाचार पत्र “पिलखा भूमि” में प्रमाण सहित खबर प्रकाशित होने के बावजूद स्थानीय स्तर पर रिकॉर्ड्स को हेरफेर करने और मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा था। हैरानी की बात यह है कि इस गंभीर लापरवाही पर समाचार प्रकाशित होने के बाद भी संबंधित विभाग द्वारा उस ‘स्मरण पत्र’ पर अब तक क्या कार्रवाई की गई, यह तथ्य अभी तक सामने नहीं आया है। इसी बीच यह बड़ी जानकारी भी सामने आई है कि उक्त सभी आरटीआई आवेदनों की वैधानिक समय-अवधि आगामी दिनांक 18/05/2026 को समाप्त हो रही है, जिसके तुरंत बाद प्रार्थी द्वारा वकील के माध्यम से प्रथम अपील दायर करने की विधिक कार्रवाई भी शुरू कर दी जाएगी। विभाग की इसी रहस्यमयी चुप्पी, हठधर्मिता, रिकॉर्ड छिपाने की आशंका और समय-सीमा समाप्त होने को देखते हुए अब प्रार्थी द्वारा मामले के सभी प्रामाणिक दस्तावेजों, आरटीआई आईडी और अकाट्य डाक रसीदों के साथ सीधे राज्य मुख्यालय एवं संबंधित मंत्रालय (रायपुर) में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर शिकायत दर्ज कराने का निर्णय लिया गया है।

आगामी सोमवार सुबह वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष यह पूरा चिट्ठा प्रस्तुत किया जाएगा। विधिक जानकारों के मुताबिक, शासकीय पत्रों की हेरफेर, विभागीय उदासीनता और पारदर्शिता से खिलवाड़ के इस गंभीर मामले में दोषी पाए जाने वाले कारिंदों की सेवा रिकॉर्ड और सेवानिवृत्ति लाभों (पेंशन) पर सीधी गाज गिरना तय माना जा रहा है। सोमवार की इस बड़ी प्रशासनिक हलचल पर अब पूरे क्षेत्र की निगाहें टिकी हुई हैं।













