
विश्रामपुर में इंडस्ट्रियल कनेक्शन का बड़ा खेल सवालों के घेरे में बिजली विभाग की कार्यप्रणाली
अति-उत्साह या कुछ और आम उपभोक्ता काट रहे चक्कर उद्योगों पर विभाग मेहरबान जांच की उठी मांग
पिलखाभूमि /सूरजपुर जिले के विश्रामपुर क्षेत्र में इन दिनों बिजली विभाग की कार्यशैली चर्चा और विवादों के केंद्र में है। क्षेत्र में बिजली के ‘इंडस्ट्रियल कनेक्शन’ (औद्योगिक कनेक्शन) बांटने में दिखाई जा रही असाधारण तेजी ने पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोग और आम उपभोक्ता अब यह पूछ रहे हैं कि आखिर नियमों की अनदेखी कर या प्रक्रिया में ‘शॉर्टकट’ अपनाकर किसे लाभ पहुँचाया जा रहा है
रफ्तार पर शक:
आम आदमी को ‘वेटिंग’, उद्योगों को ‘ग्रीन सिग्नल’
विश्रामपुर क्षेत्र में पिछले कुछ महीनों में हाई लोड और औद्योगिक कनेक्शनों की संख्या में अचानक उछाल आया है।
सूत्रों की मानें तो इन कनेक्शनों के लिए लाइन विस्तार, ट्रांसफार्मर इंस्टालेशन और तकनीकी निरीक्षण जैसे जटिल काम रिकॉर्ड समय में पूरे किए जा रहे हैं।
दूसरी ओर, स्थिति इसके उलट है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि
आम उपभोक्ताओं को मीटर बदलने या छोटे लोड बढ़ाने जैसे कामों के लिए हफ़्तों दफ्तर के चक्कर काटने पड़ते हैं।
औद्योगिक मामलों में विभाग की फाइलें बिजली की गति से दौड़ रही हैं।
तकनीकी निरीक्षण और नियमों की दुहाई
खबर है कि लोड स्वीकृति और तकनीकी जांच की प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव है। कुछ स्थानीय सूत्रों और उद्योग जगत से जुड़े लोगों के बीच यह चर्चा आम है कि तकनीकी निरीक्षण करने वाले अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध हो सकती है।
बड़े सवाल जो जवाब मांगते हैं:
विश्रामपुर क्षेत्र में हाल ही में कितने इंडस्ट्रियल कनेक्शन जारी हुए
तकनीकी निरीक्षण के दौरान नियमों का शत-प्रतिशत पालन हुआ या नहीं
लाइन विस्तार के खर्च और विभागीय मापदंडों में तालमेल है या नहीं?
जांच की सुई अधिकारियों की ओर
इस पूरे प्रकरण में अब सबकी निगाहें सूरजपुर बिजली विभाग के जिला अधिकारी पर टिकी हैं। क्षेत्र के जागरूक नागरिकों का कहना है कि यदि इन कनेक्शनों की निष्पक्ष जांच कराई जाए, तो विश्रामपुर बिजली तंत्र के भीतर चल रहे किसी बड़े खेल का खुलासा हो सकता है।
फिलहाल, विभाग के गलियारों में सन्नाटा है, लेकिन जनता के बीच यह मुद्दा गरमाता जा रहा है। अब देखना यह होगा कि विभाग अपनी साख बचाने के लिए जांच का आदेश देता है या फिर ‘इंडस्ट्रियल कनेक्शन’ का यह ‘शॉर्टकट’ खेल यूं ही चलता रहेगा।
विश्रामपुरमें औद्योगिक विकास का स्वागत है, लेकिन इसकी आड़ में नियमों को ताक पर रखना और भ्रष्टाचार की चर्चाएं विभाग की छवि धूमिल कर रही हैं। उच्चाधिकारियों को इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।








