
पिलखाभूमि अंबिकापुर (छत्तीसगढ़): शहर के गंगापुर स्थित शासकीय मेडिकल कॉलेज के लिए आवंटित बेशकीमती जमीन को आज जिला प्रशासन ने भारी पुलिस बल की मौजूदगी में अतिक्रमण मुक्त करा लिया है। जहाँ एक ओर प्रशासन इसे विकास के लिए जरूरी कदम बता रहा है, वहीं दूसरी ओर 39 परिवारों के आशियाने उजड़ने से हड़कंप मच गया है।
प्रभावित 39 परिवारों का पक्ष:
सिर से छिन गई छत कार्रवाई के दौरान मौके पर मौजूद प्रभावित परिवारों में भारी आक्रोश और दुख देखा गया। परिवारों का कहना है कि वे यहाँ वर्षों से रह रहे थे और उनके पास जाने के लिए कोई दूसरी जगह नहीं है।
बयान 1: हम सालों से यहाँ रह रहे हैं, अचानक इस तरह घर तोड़ देना हमारे साथ अन्याय है। अब हम अपने बच्चों को लेकर इस धूप में कहाँ जाएंगे?”
बयान 2: हमें प्रशासन से पुनर्वास की उम्मीद थी। अगर यह जमीन कॉलेज की थी, तो हमें कहीं और बसाने की व्यवस्था की जानी चाहिए थी। हमारे पास सिर छुपाने की अब कोई जगह नहीं बची।
कई महिलाओं और बुजुर्गों की आँखों में आँसू थे, जो अपने घरेलू सामान को मलबे से समेटते नजर आए।
आवंटित भूमि पर था वर्षों से कब्जा
प्रशासनिक रिकॉर्ड के अनुसार, गंगापुर स्थित यह पूरी जमीन आधिकारिक तौर पर मेडिकल कॉलेज को आवंटित की जा चुकी थी। कॉलेज के विस्तार, बाउंड्री वॉल और अस्पताल की सुरक्षा के लिए इस जमीन को खाली कराना अनिवार्य था।
प्रशासनिक अमले की बड़ी कार्रवाई
मंगलवार सुबह राजस्व विभाग और पुलिस बल के पहुँचते ही इलाके में तनाव की स्थिति बन गई थी।
सुरक्षा व्यवस्था: भारी पुलिस बल ने इलाके को घेर रखा था ताकि विरोध प्रदर्शन उग्र न हो।
राजस्व की सख्ती: एसडीएम और तहसीलदार की मौजूदगी में सीमांकन के पश्चात 39 घरों को हटाने की प्रक्रिया पूरी की गई।
समाचार के मुख्य बिंदु:
बेघर हुए 39 परिवार: प्रशासन ने चिन्हित किए गए सभी अवैध निर्माणों को पूरी तरह हटा दिया है।
कॉलेज विस्तार का मार्ग प्रशस्त: अब मेडिकल कॉलेज प्रशासन अपनी आवंटित भूमि पर निर्माण कार्य सुचारू रूप से कर सकेगा।
मानवीय पहलू: कार्रवाई के बाद प्रभावित परिवारों के पुनर्वास का सवाल अब प्रशासन के सामने खड़ा है।
अधिकारियों का पक्ष:
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह भूमि जनहित और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए आरक्षित है। कब्जाधारियों को पूर्व में कई बार नोटिस और मौखिक चेतावनी दी गई थी, लेकिन जगह खाली नहीं की गई, जिसके चलते यह कड़ा कदम उठाना पड़ा।
पिलखा भूमि’ विशेष टिप्पणी: विकास की राह में अतिक्रमण हटाना जरूरी है, लेकिन 39 परिवारों के अचानक बेघर होने से उपजे मानवीय संकट पर भी प्रशासन को गंभीरता से विचार करना होगा।






