
20 साल का आतंक खत्म: आबकारी उड़नदस्ता ने गुड़िया और उसके सप्लायरों को घसीटकर भेजा जेल!
पिलखाभूमि अंबिकापुर सरगुजा की धरती पर नशे का जहर घोलने वाली सबसे बड़ी मछली आखिरकार जाल में फंस गई है। दर्रीपारा की कुख्यात ब्राउन शुगरिस्ट शोभा कुशवाहा उर्फ गुड़िया, जो दशकों से कानून की आंखों में धूल झोंक रही थी, उसे आबकारी उड़नदस्ता ने भारी मात्रा में ‘मौत के इंजेक्शनों’ के साथ दबोच लिया है। यह केवल एक गिरफ्तारी नहीं, बल्कि नशे के पूरे नेटवर्क पर एक ‘डेथ वारंट’ है!
रोंगटे खड़े कर देने वाला एक्शन:
फिल्मी स्टाइल में घेराबंदी: सहायक जिला आबकारी अधिकारी रंजीत गुप्ता को खबर मिली कि गुड़िया के घर ‘मौत की खेप’ उतरी है। जैसे ही उड़नदस्ता की गाड़ियां दर्रीपारा में दाखिल हुईं, हड़कंप मच गया।
भागने की नाकाम कोशिश: सरकारी गाड़ी देख गुड़िया झोला लेकर गलियों में भागी, लेकिन जांबाज महिला सैनिकों ने उसे चीते की रफ्तार से खदेड़कर दबोच लिया।
झोले में मिला ‘जहर’: तलाशी ली गई तो होश उड़ गए! 106 नग Rexogesic और 72 नग Avil इंजेक्शन—ये वो सामान था जो अंबिकापुर के सैकड़ों युवाओं की जिंदगी तबाह करने वाला था।

गुड़िया’ की जुबान खुली और ढह गया पूरा किला!
जैसे ही गुड़िया पर शिकंजा कसा, उसने अपने आकाओं के नाम उगल दिए। आबकारी टीम ने बिना वक्त गंवाए मनु श्रीवास्तव और सुंदर लाल कुर्रे को उनके बिलों से खींचकर बाहर निकाला। इन तीनों आरोपी को विशेष न्यायाधीश नारकोटिक्स अंबिकापुर के सामने पेश किया गया, जहाँ से उन्हें सीधा जेल की काल कोठरी में फेंक दिया गया है।
एक्शन के असली हीरो:
जिला आबकारी अधिकारी इन्द्रबली सिंह मार्कण्डेय के मास्टर प्लान और रंजीत गुप्ता की निडर लीडरशिप ने यह साबित कर दिया है कि अब नशे के सौदागरों के लिए सरगुजा में कोई जगह नहीं है। इस मिशन को अंजाम देने में मुख्य आरक्षक रमेश दुबे, कुमारू राम, अशोक सोनी और नगर सैनिकों ने अपनी जान की बाजी लगा दी।
पिल्खाभूमि की अपील: नशे के इन सौदागरों की सूचना तुरंत प्रशासन को दें। शहर को बचाना है, तो चुप मत रहिए!






