
पिलखाभूमि समाचार पत्र/संपादक – मनीष वैध
रायपुर/कांकेर: छत्तीसगढ़ में ‘राज्य शिक्षक सम्मान पुरस्कार 2025-26’ के नाम पर एक ऐसा खेल खेला गया है, जिसने शिक्षा विभाग की शुचिता को तार-तार कर दिया है। ‘पिलखा भूमि’ के पास मौजूद आधिकारिक दस्तावेजों ने इस ‘महाघोटाले’ की पोल खोल दी है, जहाँ मेरिट में अव्वल आने वाले शिक्षक के हक पर सरेआम डाका डाला गया।
अंकों का ‘कत्ल’: योग्यता हारी, सेटिंग जीती!
कांकेर जिले की सत्यापित मेरिट सूची विभाग के काले कारनामों का सबसे बड़ा सबूत है। दस्तावेजों के अनुसार चयन प्रक्रिया का गणित कुछ इस प्रकार था:

दामेसय बघेल (व्याख्याता): इन्होंने 100 में से 72 अंक प्राप्त कर जिले में दूसरा स्थान हासिल किया।
बोधन लाल साहू (शिक्षक): इन्होंने 71 अंक प्राप्त किए और मेरिट में तीसरे स्थान पर रहे।
नियमों के अनुसार सम्मान के असली हकदार श्री बघेल थे, लेकिन विभाग ने मेरिट की धज्जियां उड़ाते हुए कम अंक वाले शिक्षक को उपकृत कर दिया। आखिर 72 अंक वाला अयोग्य और 71 अंक वाला योग्य कैसे हो गया? यह सवाल अब मंत्रालय की साख पर बट्टा लगा रहा है।



राष्ट्रीय आयोग का चाबुक: ‘समन’ की तैयारी
इस धांधली की गूँज दिल्ली तक पहुँच चुकी है। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) ने मामले को बेहद गंभीर मानते हुए स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को कड़ा नोटिस जारी किया है। आयोग ने चेतावनी दी है कि यदि 15 दिनों में संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो जिम्मेदार अफसरों को अनुच्छेद 338A के तहत ‘समन’ जारी कर दिल्ली तलब किया जाएगा।

सत्ता के गलियारों से सीधे सवाल
इस ‘महाघोटाले’ ने अब शासन की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं:
- राज्यपाल महोदया से सवाल: आप प्रदेश की संवैधानिक प्रमुख हैं, क्या एक आदिवासी शिक्षक के साथ हुए इस अन्याय और नियमों की अवहेलना पर राजभवन हस्तक्षेप करेगा?
- मुख्यमंत्री से सवाल: मुख्यमंत्री जी, क्या आपकी “सुशासन की नीति” में योग्यता की बलि चढ़ाना और अपनों को उपकृत करना शामिल है? क्या आपकी सुशासन की यह नीति केवल कागजों तक सीमित है, या फिर मेरिट का कत्ल करने वाले इन ‘सफेदपोश’ अधिकारियों पर गाज भी गिरेगी?
- शिक्षा मंत्री से सवाल: आपके नाक के नीचे चयन सूची में इतनी बड़ी हेराफेरी कैसे हो गई? क्या विभाग ‘अपनों’ को उपकृत करने का अड्डा बन गया है?

पिलखा भूमि की विशेष टिप्पणी:
“पुरस्कार और सम्मान किसी खैरात की वस्तु नहीं हैं, जिन्हें राजनीतिक रसूख या ‘सेटिंग’ के आधार पर बांटा जाए। जब एक अनुभवी आदिवासी शिक्षक, जिसने 36 साल तक वनांचल की सेवा की, उसे महज एक अंक की हेराफेरी करके सूची से बाहर कर दिया जाता है, तो यह केवल एक व्यक्ति का नहीं बल्कि पूरी ‘योग्यता’ का कत्ल है। ‘पिलखा भूमि’ इस अन्याय के खिलाफ तब तक सवाल पूछता रहेगा, जब तक कि असली हकदार को उसका सम्मान वापस नहीं मिल जाता। सत्य के लिए हमारा साहस अटूट है।”

विभाग का पक्ष: इस खबर के संबंध में ‘पिलखा भूमि’ द्वारा विभाग का पक्ष जानने का निरंतर प्रयास किया जा रहा है। जैसे ही जिला शिक्षा अधिकारी (DEO), संचालक (DPI) या संबंधित उच्च अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष सामने आएगा, उसे भी प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया जाएगा।
ब्यूरो रिपोर्ट: पिलखा भूमि (सत्य और साहस का प्रतीक)











