
अंबिकापुर में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर मुख्यमंत्री का विपक्ष को कड़ा जवाब— “पहले अपने गिरेबान में झांकें”
पिलखा भूमि।अंबिकापुर: छत्तीसगढ़ में अब कोरी बयानबाजी नहीं, बल्कि अतीत के कारनामों और ‘जेल-बेल’ के गणित पर आर-पार की जंग शुरू हो गई है। सरगुजा संभाग के दो दिवसीय प्रवास पर पहुंचे प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज ‘अंतरराष्ट्रीय योग दिवस’ के गरिमामय अवसर पर विपक्ष पर अब तक का सबसे तीखा और सीधा हमला बोला है। योग कार्यक्रम के पश्चात मीडियाकर्मियों से अनौपचारिक चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने सरकार पर अनर्गल आरोप लगाने वालों को कड़ा आईना दिखाया। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि उंगली उठाने से पहले लोग अपनी असलियत और पिछले 5 साल के काले कारनामों को याद कर लें।

मुख्यमंत्री साय ने कड़े और बेबाक लहजे में कहा:
“आरोप लगाने वालों को शायद जमीनी वास्तविकता का पता ही नहीं है, उन्हें पहले सच का पता लगाना चाहिए। आज जो लोग बड़ी-बड़ी बातें कर रहे हैं, वे पहले अपने गिरेबान में झांक कर देखें कि उनका खुद का 5 साल का कार्यकाल कैसा रहा है। उन्होंने हर चीज में सिर्फ और सिर्फ घोटाला किया और छत्तीसगढ़ को बेरहमी से लूटने का काम किया है।”
“सबसे बड़ा प्रमाण: आधे जेल में, बाकी बेल पर और कई जाने की तैयारी में”
विपक्ष के शासनकाल में हुए संस्थागत भ्रष्टाचार पर प्रहार करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज जनता के सामने स्थिति पूरी तरह साफ है। इसका सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि उनके कार्यकाल के कितने ही रसूखदार लोग आज जेल की सलाखों के पीछे दिन काट रहे हैं, कितने लोग बेल (जमानत) पर बाहर घूम रहे हैं, और कई ऐसे चेहरे हैं जो बहुत जल्द जेल जाने की तैयारी में हैं। कानून अपनी गति से काम कर रहा है और प्रदेश को लूटने वालों को इसकी कीमत चुकानी ही होगी।
‘पिलखा भूमि’ की संपादकीय टिप्पणी: क्या सिर्फ आरोपों से धुल जाएंगे अतीत के दाग?
पिलखा भूमि का यक्ष प्रश्न:
लोकतंत्र में विपक्ष का काम सरकार की कमियों को उजागर करना और सवाल पूछना निश्चित रूप से है, लेकिन ‘पिलखा भूमि’ यहाँ एक बुनियादी सवाल उठाता है— क्या महज बयानबाजी और नए आरोप मढ़ देने से अतीत के वो दाग धुल जाएंगे, जो पांच सालों की प्रशासनिक अनियमितताओं के कारण प्रदेश पर लगे हैं?
जब सवाल उठाने वाले हाथ खुद जांच के दायरे में हों, तो जनता के बीच उन सवालों की गंभीरता कम हो जाती है। छत्तीसगढ़ की जनता गवाह है कि बीते वर्षों में किस तरह जनहित की योजनाओं को प्रशासनिक लचरता की भेंट चढ़ाया गया, जिसके प्रमाण आज अदालतों और जांच एजेंसियों के सामने आ रहे हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का यह कड़ा रुख यह साफ संकेत देता है कि वर्तमान सरकार केवल वर्तमान को सुधारने में ही नहीं, बल्कि अतीत में जनता के हक पर मारे गए डाके का मुकम्मल हिसाब करने के लिए भी प्रतिबद्ध है। अब देखना यह होगा कि राजनीतिक शुचिता का यह दावा आने वाले समय में प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था को कितना पारदर्शी बना पाता है।
“आरोप लगाने वाले नेता पहले अपने गिरेबान में झांकें। छत्तीसगढ़ को दोनों हाथों से लूटने का काम किया गया… आज उनके लोग या तो जेल में हैं, या बेल पर हैं। अगली बारी किसकी है, यह वक्त बताएगा।”— विष्णुदेव साय, मुख्यमंत्री (अंबिकापुर में मीडिया से चर्चा के दौरान)
पिलखा भूमि समाचार पत्र











