- शासकीय भूमि कब्जा कर खोदे गड्ढे, बस्ती में 2 मिनट खड़ा रहना दूभर; पंचायत के नोटिस और ग्राम सभा के फैसले को दबंगई से ठेंगा
- पीने के पानी में घुला जहर, मासूम बच्चे और परिवार बीमारी की कगार पर; बेपरवाह PHE अफसरशाही ने झाड़ा पल्ला
- सरकारी संपत्ति का खुला व्यावसायिक दोहन, फिर भी राजस्व और पंचायत अमला बेबस; कलेक्टर जनदर्शन पहुंचा मामला
सूरजपुर / कसकेला (पिलखा भूमि ब्यूरो):
सूरजपुर जनपद पंचायत अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत कसकेला में नियमों और जनस्वास्थ्य को ताक पर रखकर रिहायशी बस्ती के बीच शासकीय भूमि पर अवैध रूप से सुअर पालन का गंभीर मामला सामने आया है। सुअर बाड़े से निकलने वाली भयंकर सड़ांध, खुले में बहते मलमूत्र और पास के पीने के पानी के कुएं में हो रहे रिसाव से पड़ोसियों का सांस लेना और जीना दूभर हो गया है। ग्राम पंचायत, ग्राम सभा और सरपंच-सचिव के आदेशों को ठेंगा दिखाने के बाद अब यह मामला सूरजपुर कलेक्टर के जनदर्शन तक पहुंच गया है।

क्या है पूरा मामला?
प्राप्त दस्तावेजों और आवेदनों के अनुसार, ग्राम पंचायत कसकेला निवासी लोभन पिता मंगल साय द्वारा बस्ती के बीच शासकीय भूमि पर दो अलग-अलग स्थानों पर बड़े पैमाने पर सुअर पालन का व्यवसाय किया जा रहा है। इसके लिए जेसीबी से बड़े-बड़े गड्ढे खोदे गए हैं और नालियां बनाई गई हैं, जिनमें सुअरों का मलमूत्र और गंदा पानी लगातार जमा हो रहा है।
इस अवैध सुअर पालन के ठीक बगल में शिवकुमार, रामकुमार, गुठालू और धनिया बाई सहित कई परिवारों के मकान स्थित हैं। पड़ोसियों का आरोप है कि गंदगी और मलमूत्र का पानी रिसकर उनके पीने के एकमात्र कुएं में जा रहा है, जिससे कुएं का पानी पूरी तरह दूषित और बदबूदार हो चुका है। दूषित पानी पीने की मजबूरी के कारण परिवार के सदस्यों और छोटे बच्चों का स्वास्थ्य लगातार बिगड़ रहा है।

पंचायत के पंचनामा में खुली पोल, 2 मिनट खड़ा रहना भी मुश्किल
पीड़ित शिवकुमार पिता बहाली राम द्वारा की गई शिकायत पर जब ग्राम पंचायत कसकेला के सरपंच, उपसरपंच, सचिव, रोजगार सहायक और ग्रामीणों ने मौके का मुआयना किया, तो वहां हालात बेहद नारकीय पाए गए। बदबू और सड़ांध का आलम यह था कि जांच के लिए पहुंचे जनप्रतिनिधि और ग्रामीण मौके पर 2 मिनट भी खड़े नहीं रह सके।

इसके बाद ग्राम पंचायत द्वारा लोभन को 7 दिवस के भीतर रिहायशी इलाके से सुअर बाड़ा हटाने का लिखित नोटिस जारी किया गया, लेकिन उसने नोटिस लेने तक से इनकार कर दिया।
ग्राम सभा के प्रस्ताव को भी दरकिनार किया
दिनांक 30 जुलाई 2026 को इस गंभीर विषय को लेकर बाकायदा विशेष ग्राम सभा आहूत की गई। ग्राम सभा में सरपंच, पंचों और ग्रामीणों ने समझाइश देते हुए बस्ती से हटाकर सुअर पालन किसी दूर स्थान पर करने का निर्णय लिया। लेकिन लोभन अपनी जिद पर अड़ा रहा और उसने साफ कह दिया कि इससे किसी को कोई परेशानी नहीं है। इसके बाद ग्राम पंचायत ने सर्वसम्मति से सुअर पालन को गांव से बाहर स्थानांतरित करने का प्रस्ताव पारित किया।

पीएचई का गैर-जिम्मेदाराना रवैया: ‘हम हैंडपंप जांचते हैं, कुआं नहीं’
ग्रामीणों के स्वास्थ्य को देखते हुए ग्राम पंचायत ने 4 अगस्त 2026 को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लटोरी, बीएमओ और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) को पत्र लिखकर पानी की जांच कराने और महामारी की आशंका पर कार्रवाई करने की मांग की थी। लेकिन पीएचई के अमले ने मौके पर आकर जांच की औपचारिकता निभाई और यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि “वे केवल सरकारी हैंडपंप के पानी की जांच करते हैं, निजी या खुले कुएं की नहीं।” विभाग की इस संवेदनहीनता से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।
कलेक्टर जनदर्शन में पहुंचा मामला, प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार
पंचायत स्तर पर कोई सुनवाई न होने और दो माह से नरक भोग रहे ग्रामीणों ने अंततः सूरजपुर जिला कलेक्टर जनदर्शन (टोकन क्रमांक: 2250326001939) में लिखित गुहार लगाई है। आवेदन में स्पष्ट मांग की गई है कि शासकीय भूमि पर हुए अवैध कब्जे को खाली कराया जाए और गांव में किसी महामारी (डायरिया, पीलिया या हैजा) के फैलने से पहले रिहायशी इलाके से सुअर बाड़े को तत्काल प्रभाव से हटाया जाए।
अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस मामले में कब तक संज्ञान लेता है या फिर किसी बड़ी बीमारी और अनहोनी के बाद ही नींद से जागेगा।
संपादकीय टिप्पणी (चीफ एडिटर कलम से):
अफसरशाही की अंधी आंखें, सरकारी जमीन पर डकैती और PHE का अजीब तर्क!
कसकेला का यह मामला सिर्फ दो पक्षों की आपसी रंजिश या सामान्य सुअर पालन का नहीं, बल्कि सरकारी तंत्र के उस सड़े-गले ढर्रे का जीता-जागता सबूत है जहां आम नागरिक की जान की कीमत कौड़ी बराबर समझी जाती है।
सवाल सरकारी संपत्ति की लूट का भी है: गांव के बीचों-बीच स्थित बेशकीमती शासकीय भूमि पर खुलेआम जेसीबी चलाकर गड्ढे खोदे जा रहे हैं, निजी मुनाफे के लिए सरकारी जमीन को नरक बना दिया गया है और स्थानीय पटवारी से लेकर राजस्व विभाग तक गहरी नींद में सो रहा है। क्या सरकारी जमीनें सिर्फ दबंगई से कब्जा करने और प्रदूषण फैलाने के लिए छोड़ी गई हैं?
पीएचई का हास्यास्पद बहाना: सबसे बड़ा सवाल लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) के उन अफसरों से है, जो मौके पर जाकर फरमान सुनाते हैं कि ‘हम सिर्फ हैंडपंप जांचते हैं, कुआं नहीं’। जब उसी कुएं का सीपेज वाला बदबूदार पानी पीकर मासूम बच्चे अस्पताल में उल्टी-दस्त से तड़पेंगे, तब क्या पीएचई के कागजी नियम उनकी जान बचा पाएंगे?
एक तरफ शासकीय जमीन पर सीनाजोरी, दूसरी तरफ ग्राम सभा के संवैधानिक प्रस्ताव का सरेआम अपमान। कलेक्टर महोदय, जनदर्शन का टोकन सिर्फ फाइलों में दबकर न रह जाए; इससे पहले कि कसकेला में डायरिया-हैजा फैले, तत्काल राजस्व विभाग को भेजकर सरकारी जमीन को कब्जामुक्त कराइए और संवेदनहीन पीएचई अमले की जवाबदेही तय कीजिए!
कानूनी अस्वीकरण (Legal Disclaimer):
यह समाचार ग्राम पंचायत कसकेला द्वारा जारी आधिकारिक नोटिस, विशेष ग्राम सभा के प्रस्ताव, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लटोरी/पीएचई को प्रेषित पत्र और सूरजपुर कलेक्टर जनदर्शन में दर्ज शिकायत (टोकन क्र. 2250326001939) से प्राप्त आधिकारिक दस्तावेजों एवं ग्रामीणों के बयानों पर आधारित है। समाचार का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष की सामाजिक या व्यक्तिगत छवि को ठेस पहुंचाना नहीं, बल्कि शासकीय भूमि के संरक्षण और जनस्वास्थ्य के प्रति प्रशासन का ध्यान आकर्षित कराना है। यदि संबंधित विभाग अथवा अनावेदक पक्ष अपना आधिकारिक पक्ष प्रस्तुत करना चाहता है, तो पोर्टल पर उसका समुचित स्वागत है।






































