दूरी अब नहीं बनेगी शिक्षा की रुकावट, शासन की योजना से आसान होगी बेटियों की राह: देवधन राम बिंझिया
पिलखाभूमि ब्यूरो, जयनगर (सूरजपुर)
स्थानीय पीएम श्री स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, जयनगर में शासन की महत्वाकांक्षी ‘मुख्यमंत्री सरस्वती सायकल योजना’ के अंतर्गत कक्षा 9वीं की छात्राओं को निःशुल्क सायकल वितरण किया गया। 30 बालिकाओं को सायकल की चाबी सौंपने के साथ ही उनका मुंह मीठा कराया गया, जिससे पूरे परिसर में उत्साह का माहौल रहा।
कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ मुख्य अतिथि भाजपा जिला उपाध्यक्ष देवधन राम बिंझिया, भाजपा मंडल उपाध्यक्ष भागवत प्रजापति, मंडल महामंत्री व सांसद प्रतिनिधि देवशरण सिंह, स्थानीय सरपंच श्रीमती राधा देवी, जनपद सदस्य श्रीमती धनेश्वरी सिंह, SMC अध्यक्ष (ट्राइबल हिंदी मीडियम) कृष्ण पाल बिंझिया, SMC शिक्षा अध्यक्ष ब्रम्हदेव बिंझिया, SMC सदस्य बिनोद बिंझिया तथा कार्यालय मंत्री भूलचू राजवाड़े द्वारा मां सरस्वती एवं मां भारती के छायाचित्र पर दीप प्रज्वलन व माल्यार्पण कर किया गया। विद्यालय परिवार द्वारा अतिथियों का आत्मीय स्वागत पुष्पगुच्छ व माल्यार्पण से किया गया।
शिक्षा के विस्तार में मील का पत्थर साबित होगी योजनाप्राचार्य श्रीमती पुष्पा राय ने स्वागत भाषण में विद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों और योजनाओं के क्रियान्वयन पर प्रकाश डाला। मुख्य अतिथि देवधन राम बिंझिया ने अपने संबोधन में कहा कि ग्रामीण अंचलों में 5 से 7 किलोमीटर की दूरी तय कर स्कूल पहुंचने वाली छात्राओं के लिए यह योजना वरदान साबित होगी। इससे न केवल उनकी राह सुगम होगी, बल्कि ड्रापआउट दर में भी भारी कमी आएगी। इसके साथ ही सांसद प्रतिनिधि देवशरण सिंह एवं SMC अध्यक्ष कृष्णपाल बिंझिया ने भी छात्राओं को लगन और अनुशासन के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
इस अवसर पर पालकगण रमेश गुप्ता, सुमन गुप्ता, निकुंज सिरदार, राजेन्द्र प्रसाद सहित विद्यालयीन स्टाफ और बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण उपस्थित रहे। कार्यक्रम का प्रभावी मंच संचालन व्याख्याता श्रीमती अमृता सिंह ने किया तथा आभार प्रदर्शन प्रभारी प्राचार्य विरेन्द्र जायसवाल द्वारा किया गया।
संपादकीय दृष्टिकोण:
ग्रामीण व वनांचल क्षेत्रों में बेटियों की पढ़ाई के बीच अक्सर लंबी दूरी और आवागमन के सीमित साधन सबसे बड़ी बाधा बनते हैं। ‘मुख्यमंत्री सरस्वती सायकल योजना’ केवल एक भौतिक साधन का वितरण नहीं, बल्कि उन बेटियों के आत्मविश्वास और नियमित उपस्थिति को पंख देने का सशक्त प्रयास है जो रोजाना 5 से 7 किलोमीटर का सफर तय करती हैं। प्रशासन और विद्यालय प्रबंधन की यह जिम्मेदारी भी बनती है कि समय पर इन योजनाओं का लाभ हर पात्र छात्रा तक पहुंचे, ताकि दूरियों के चलते किसी बिटिया की शिक्षा अधूरी न रहे।






































