पिलखाभूमि डेस्क: सरगुजा संभाग
हम लोक निर्माण विभाग के अत्यंत संवेदनशील अभियंताओं और उन परम तपस्वी ठेकेदारों के प्रति हृदयतल से अनन्य कृतज्ञता ज्ञापित करते हैं, जिन्होंने प्रतापपुर से समरस्रोत के मध्य ‘अति-आधुनिक शिल्पकला’ का ऐसा अलौकिक दृश्य प्रस्तुत किया है कि देखकर नयन तृप्त हो जाएं। अभी कुछ ही महीने पूर्व की तो पावन बात है, जब इस मार्ग के उद्धार हेतु ‘मरम्मत’ का कार्य संपन्न हुआ था। सरकारी खजाने से जनता की गाढ़ी कमाई खर्च कर ऐसा काम किया गया कि महज कुछ ही महीनों के भीतर डामर का नामोनिशान मिट गया और मार्ग पर चारों तरफ उखड़ी गिट्टियां व कीचड़ के ताल-तलैया बिछ गए।
ठेकेदारों के इस अप्रतिम निर्माण और जादुई गुणवत्ता का साक्षात दर्शन करने यदि छत्तीसगढ़ शासन के कृषि मंत्री रामविचार नेताम जी स्वयं अपने अमूल्य समय में से क्षण निकालकर न पधारते, तो शायद इस जमीनी बदहाली का इतिहास अधूरा रह जाता।
विवादों और सोशल मीडिया की तैरती तस्वीरों के बीच इस पूरे घटनाक्रम का सबसे प्रत्यक्ष पहलू तब सामने आया, जब प्रतापपुर-समरस्रोत मार्ग के घुटने तक भरे पानी और गहरे गड्ढों में माननीय मंत्री जी का खुद का काफिला इस कदर फंसा कि वे शिक्षक दिवस के एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम में पूरे दो घंटे के विलंब से पहुंचे। अपनी गाड़ियों को कीचड़ और गड्ढों के बीच खड़ा देख मंत्री जी का पारा चढ़ गया और उन्होंने मौके से ही बलरामपुर कलेक्टर को फोन घुमाकर लापरवाह निर्माण एजेंसियों व अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई का फरमान सुना दिया।

इधर सोशल मीडिया के पटल पर माननीय मंत्री जी की एक बेहद गंभीर और विचारमग्न मुद्रा वाली तस्वीर वायरल हो रही है। बिट्टू सिंह राजपूत जी सहित कई नागरिकों ने इस दृश्य को फेसबुक पर साझा करते हुए व्यंग्यात्मक भाव से लिखा है— ‘छत्तीसगढ़ सरकार के वरिष्ठ मंत्री आदरणीय रामविचार नेताम जी… तीन साल की सड़कों के विकास को करीब से देख रहे हैं।’

वहीं सोशल मीडिया पर जनता का दर्द और तंज यहीं नहीं थमा। अरुण सोनी (Arun Soni) ने भी इसी बदहाल मार्ग पर खड़े मंत्री जी के काफिले की तस्वीर साझा करते हुए एक और दुखती रग पर उंगली रख दी। उन्होंने बड़े ही मर्मस्पर्शी अंदाज में लिखा— ‘काश माननीय मंत्री नेताम जी सेमरसोत वाला रोड की जगह अंबिकापुर से बलरामपुर NH343 मुख्य मार्ग से गए होते, यह सड़क तो दलदल बन गई है।’ यानी जनता अब माननीय को यह याद दिलाने में जुटी है कि सेमरसोत तो केवल एक बानगी है, यदि वे राष्ट्रीय राजमार्ग NH-343 से गुजरते तो उन्हें ज्ञात होता कि संभाग की लाइफलाइन कही जाने वाली मुख्य सड़क भी किस तरह दलदल का पर्याय बन चुकी है।
तस्वीर में साफ नजर आ रहा है कि माननीय मंत्री जी सड़क के नाम पर फैले उस अथाह पानी और दलदल के ठीक मुहाने पर खड़े हैं। पीछे प्रशासनिक अमले की गाड़ियां कीचड़ के कारण रुकी हुई हैं। प्रतापपुर और समरस्रोत की जनता इस बात की गवाह है कि कुछ ही महीने पहले हुए पैचवर्क की गिट्टियां पहली ही बारिश में बिखर चुकी हैं और राहगीरों को नित्य जानलेवा हिचकोलों से गुजरना पड़ रहा है।
संपादकीय टिप्पणी (पिलखा भूमि की कलम से):
‘बलरामपुर की सड़क पर तो गुस्सा दिखा, मगर संभाग भर में फैले इन गड्ढों का जवाबदेह कौन?’
जब तक आम जनता इन खंदकों और नुकीली गिट्टियों पर रोज गिरकर चोटिल हो रही थी, तब तक विभाग के लिए यह सामान्य स्थिति थी। मगर जैसे ही माननीय मंत्री जी के काफिले के पहिए पानी भरे गड्ढे में धंसे और शिक्षक दिवस पर दो घंटे की देरी हुई, तो अचानक अफसरों को फोन घनघनाने लगे।
लेकिन ‘पिलखा भूमि’ यह निष्पक्ष सवाल उठा रहा है कि—माननीय, अपनी गाड़ी फंसने पर आपने बलरामपुर कलेक्टर को तो कड़े निर्देश दे दिए, मगर जब सूरजपुर से लेकर बलरामपुर और अंबिकापुर के सुदूर ग्रामीण अंचलों तक की सड़कें गड्ढों और दलदल में तब्दील दिख रही हैं, तब जवाबदेही किसकी तय होगी?
कागजों पर लाखों-करोड़ों की मरम्मत दर्ज होती है और धरातल पर चंद महीनों में केवल कीचड़ और धूल नजर आती है। कलेक्टर को की गई यह कॉल तभी सार्थक मानी जाएगी, जब सड़क पर गिट्टी और डामर की घटिया गुणवत्ता की भौतिक जांच हो और जिम्मेदार ठेकेदारों व इंजीनियरों पर जमीनी कार्रवाई दिखे। केवल अपनी गाड़ी रुकने पर गुस्सा जाहिर करना काफी नहीं है, जनता की रोजमर्रा की इस बदहाली को भी उसी गंभीरता से देखना होगा।
कानूनी डिस्क्लेमर (Legal Disclaimer):अस्वीकरण: प्रस्तुत समाचार सोशल मीडिया पर प्रसारित वास्तविक तस्वीर, प्रतापपुर-समरस्रोत मार्ग पर जलभराव व गड्ढों की प्रत्यक्ष स्थिति, माननीय मंत्री के काफिले के विलंब और जिला प्रशासन को दिए गए निर्देशों की रिपोर्ट पर आधारित है। ‘पिलखा भूमि’ का उद्देश्य किसी भी जनप्रतिनिधि, संवैधानिक पद अथवा विभाग की व्यक्तिगत या संस्थागत प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाना नहीं है। यह सामग्री संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत जनहित और सार्वजनिक अधोसंरचना की प्रत्यक्ष गुणवत्ता को रेखांकित करने हेतु निष्पक्ष टिप्पणी (Fair Comment) के रूप में प्रकाशित की गई है। इस संबंध में संबंधित विभाग या जनप्रतिनिधि का आधिकारिक पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी पूर्ण प्रमुखता दी जाएगी।


































