
पिलखाभूमि नवा रायपुर / कांकेर। छत्तीसगढ़ के शिक्षा विभाग में ‘राज्य शिक्षक सम्मान वर्ष 2025-26’ की संभावित सूची को लेकर एक ऐसा सनसनीखेज और पुख्ता सच सामने आया है, जो सीधे राजधानी रायपुर स्थित लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) के बंद कमरों में होने वाले ‘खेल’ को बेनकाब करता है।
विश्वस्त सूत्रों और आरटीआई के दस्तावेजों से साफ हुआ है कि कांकेर जिला स्तर से तो मेरिट के आधार पर बिल्कुल सही और निष्पक्ष सूची बनाकर भेजी गई थी, लेकिन जैसे ही यह फाइल नवा रायपुर स्थित लोक शिक्षण संचालनालय पहुंची, वहां बैठे अफसरों ने पूरी लिस्ट को ही पलट दिया। यह पूरा मामला 6 अक्टूबर 2025 को तब उजागर हुआ, जब कांकेर जिले के एक पीड़ित व्याख्याता ने सीधे लोक शिक्षण संचालनालय के संचालक को पत्र लिखकर इस धांधली के खिलाफ हाई कोर्ट जाने की अनुमति मांगी। आज इस आपत्तिजनक लिस्ट के सामने आए और शिकायत दर्ज हुएविश्वस्त सूत्रों और आरटीआई के दस्तावेजों से साफ हुआ है कि कांकेर जिला स्तर से तो मेरिट के आधार पर बिल्कुल सही और निष्पक्ष सूची बनाकर भेजी गई थी, लेकिन जैसे ही यह फाइल नवा रायपुर स्थित लोक शिक्षण संचालनालय पहुंची, वहां बैठे अफसरों ने पूरी लिस्ट को ही पलट दिया। यह पूरा मामला 6 अक्टूबर 2025 को तब उजागर हुआ, जब कांकेर जिले के एक पीड़ित व्याख्याता ने सीधे लोक शिक्षण संचालनालय के संचालक को पत्र लिखकर इस धांधली के खिलाफ हाई कोर्ट जाने की अनुमति मांगी। आज इस आपत्तिजनक लिस्ट के सामने आए और शिकायत दर्ज हुए 7 महीने से अधिक का समय (अक्टूबर 2025 से मई 2026 तक) बीत चुका है, लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि लोक शिक्षण संचालनालय इस गंभीर गड़बड़ी पर पूरी तरह कुंभकर्णी नींद सो रहा है। विभाग अपनी इस कालिख को धोने और मामले को सुलझाने के बजाय इसे ठंडे बस्ते में दबाए बैठा है। 7 महीने से अधिक का समय (अक्टूबर 2025 से मई 2026 तक) बीत चुका है, लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि लोक शिक्षण संचालनालय इस गंभीर गड़बड़ी पर पूरी तरह कुंभकर्णी नींद सो रहा है। विभाग अपनी इस कालिख को धोने और मामले को सुलझाने के बजाय इसे ठंडे बस्ते में दबाए बैठा है।

72 बनाम 71 का खेल: जिला समिति की रिपोर्ट पर लोक शिक्षण संचालनालय ने फेरा पानी
शिकायतकर्ता श्री दामेसाय बघेल (व्याख्याता, शासकीय हाईस्कूल अनुपुपर, विकास खण्ड कोयलीबेड़ा, जिला उत्तर बस्तर कांकेर) को जब राज्य स्तर की सूची में अपना नाम गायब दिखा, तो उन्होंने आरटीआई (सूचना का अधिकार) का सहारा लिया। आरटीआई से जो सच निकला, उसने चयन प्रक्रिया की धज्जियां उड़ा दीं:

जिला स्तर पर टॉपर थे बघेल: जिला स्तरीय चयन समिति (DSC) कांकेर ने पूरी ईमानदारी से मूल्यांकन करते हुए दामेसाय बघेल को 72/100 अंक देकर जिले में द्वितीय स्थान पर चुना था और उनका नाम आगे बढ़ाया था।

संचालनालय में बदल गई किस्मत: लेकिन जब फाइल लोक शिक्षण संचालनालय रायपुर पहुंची, तो नियमों को ताक पर रख दिया गया। जिला समिति द्वारा 71/100 अंक के साथ तृतीय स्थान पर रखे गए शिक्षक श्री बोधन लाल साहू (शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला चिनौरी, विकास खण्ड चारामा) का नाम फाइनल लिस्ट में चमका दिया गया।

सम्मान थमा नहीं, पर ‘लिस्ट’ पर मचा है कोहराम
राहत की बात बस इतनी है कि विभाग ने अभी तक आधिकारिक रूप से यह सम्मान प्रदान नहीं किया है, केवल चयनितों की सूची ही सामने आई है। लेकिन लिस्ट सामने आते ही विभाग की साख तार-तार हो गई है। पीड़ित शिक्षक ने अपने पत्र में साफ लिखा है कि उच्चतम अंक प्राप्त करने के बावजूद उन्हें वंचित करना सीधे तौर पर भेदभाव और भ्रष्टाचार को दर्शाता है।

पिलखा भूमि की टिप्पणी: ‘जब जिला स्तर पर सूची सही थी, तो लोक शिक्षण संचालनालय में किस आका के इशारे पर हुआ यह पाप?’
“यह सीधे-सीधे प्रशासनिक डकैती और योग्यताओं का कत्ल है। जब जिला स्तर की चयन समिति ने पूरी पारदर्शिता के साथ 72 अंक वाले को मेरिट में ऊपर रखा, तो लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) रायपुर के बंद कमरों में बैठे किस अधिकारी की कलम डगमगाई? आखिर किस अदृश्य शक्ति या तगड़ी ‘सेटिंग’ के दबाव में आकर कम नंबर वाले को सूची में ऊपर ठूस दिया गया?

सबसे शर्मनाक बात यह है कि पिछले 7 महीनों से लोक शिक्षण संचालनालय इस महापाप पर कुंभकर्णी नींद सो रहा है। अधिकारियों के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है। गनीमत है कि अभी सिर्फ लिस्ट सामने आई है और सम्मान हाथों में नहीं थमाए गए हैं, जिससे विभाग के पास इस नींद से जागने, सूची को सुधारने और अपनी बची-खुची साख बचाने का आखिरी मौका बचा है। ‘पिलखा भूमि’ सीधे तौर पर सवाल उठाता है कि जिला समिति की मेहनत पर पानी फेरने वाले संचालनालय के उन चेहरों को बेनकाब कब किया जाएगा? मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री को इस ‘संचालनालय वाले खेल’ की उच्च स्तरीय जांच करानी चाहिए और विभाग की इस गहरी नींद को तोड़ना चाहिए।”












