दपिलखा भूमि - अपन माटी अपन गोट टीम (सरगुजा)
हमर सरगुजा के आन, बान अउ सान आय रामगढ़ के पहाड़। ए पहाड़ ह सिर्फ पथरा अउ रुख-राई के ढेर नोहे, एहा हमर पुरैउ इन चढखा मन के इतिहास, संसकति अउ आक्सीजन के बैंक आय। फेर आज रामगढ़ के तराई म, हसदेव के कोरा म लगे जंगल रोअत हे। एक कोती इहाँ रामायण कालीन इतिहास हे, त दूसर कोती आज के बिकास के नाम म विनाश के खेल चलत हे।
आज “अपन माटी अपन गोट” म हमन गोठियाबो रामगढ़ के गौरव अउ ओकर ऊपर मंडरावत अदानी ग्रुप के कइना (संकट) के बारे म।
रामायण काल ले कालिदास तक: रामगढ़ के गौरवसाली इतिहास
रामगढ़ पहाड़ के इतिहास अतका जुन्ना (पुराना) हे कि गिनत-गिनत थक जाबो।
प्रभु राम के पगपगिया: कहे जाथे कि जब भगवान श्री राम ह 14 बरस के बनवास काटत रीहिस, त ओहा लक्ष्मण अउ माता सीता के संग ए पहाड़ म कुछ दिन बिताय रीहिस। इहाँ बने सीता बेंगरा (माता सीता के रसोई/कक्ष) अउ लक्ष्मण बेंगरा एकर गवाह आय।

दुनिया के पहिली नाट्यसाला: सीता बेंगरा ला दुनिया के सबले पुरानी ‘नाट्यसाला’ (थिएटर) माने जाथे, जइहां कभू नाटक अउ कला के परदरसन होवत रीहिस।
महाकवि कालिदास के ‘मेघदूतम’: इहीं रामगढ़ के पहाड़ म बइठ के महाकवि कालिदास ह अपन अमर कइत ‘मेघदूतम’ के रचना करे रीहिस। इहाँ के ‘जोगीमारा गुफा’ म मौर्य कालीन भित्तिचित्र अउ पालि भाषा के सिलालेख आज घलो मौजूद हे।
…अउ अब सरगुजा के सरग म कोयला के करिया साया
जेन रामगढ़ अउ हसदेव अरण्य ला ‘छत्तीसगढ़ के फेफड़ा’ कहे जाथे, ओकर ऊपर अब उद्योगपति मन के नजर गड़ गे हे। रामगढ़ के कतको इलाका म अदानी ग्रुप ला कोयला खदान बर जमीन दे गिस हे।

रुख-राई के कतलेआम:बिकास के नाम म हसदेव अरण्य अउ रामगढ़ के तराई वाले इलाका म हजारों साल पुराने रुख मन ला बेरहमी ले काटे जावत हे। अदानी ग्रुप के पोकलैंड अउ जैसीबी मशीन मन ह हरियर-भरी धरती ला मरुस्थल बनावत जावत हें।
‘अपन माटी’ बर आदिवासी मन के अंदोलन
ए रुख कटाई के खिलाफ इहाँ के मूल निवासी आदिवासी मन ह कतको साल ले अंदोलन करत हें। ओ मन के कहना हे कि जंगल कटिही त ओ मन के देवी-देवता के थल सिरा जाही, पर्यावरण चपट हो जाही अउ हाथी-मानव के दंद (द्वंद्व) अउ बढ़ जाही। पुलिस के पहरा म रुख मन ला कटवाए जावत हे, जेकर ले स्थानीय लोगन म भारी अकरोस हे। कल तक जइहां कालिदास के गीत गूंजत रीहिस, आज ओ रामगढ़ के आस-पास सिर्फ मशीन के घड़घड़ाहट अउ रुख मन के गिरे के रोना सुनाई देथे।
संपादकीय टिप्पणी: रामगढ़ के छाती म कुल्हाड़ी अउ सत्ता के मौन!
– मनीष वैद्य (प्रधान संपादक)
रामगढ़ के पहाड़ अउ हसदेव के जंगल हमर सरगुजा के कोरा (गोद) आय, हमर पुरखा मन के दरोहर आय। फेर आज बिकास के अइसन करिया चस्मा पहिने गे हे कि सरकार अउ उद्योगपति मन ला इहाँ के इतिहास नइ दिखत हे, दिखत हे त सिर्फ जमीन के भीतर दबे कोयला अउ ओकर ले होवइया मुनाफा।रामगढ़ के तराई म अदानी ग्रुप के मशीन मन ह रुख-राई ला अइसन काटत हें, मानों हमर सरगुजा के फेफड़ा ला ही सरीर ले अलग करे जावत हे।
प्रभु राम के बनवास के गवाह रामगढ़ आज पूंजीपति मन के लालच के बलि चढ़त हे। पुलिस के पहरा म रात-दिन रुख मन ला काटे जावत हे।

“अपन माटी अपन गोट” के मंच ले आज हम शासन-प्रसासन ले कुछ सोझा सवाल पूछथन्:
जेन जंगल ला ‘छत्तीसगढ़ के आक्सीजन बैंक’ कहे जाथे, ओला उजाड़ के कउन से बिकास के गढ़बो नवा छत्तीसगढ़?
लोकतंत्र म बैठे नेता अउ अफसर मन ह जनता के रखवार आयं की अदानी ग्रुप के चौकीदार? ओ मन के कान म जूं कतका बर नइ रेंगत हे?
रुख मन के कटई ले हाथी अउ मनखे के दंद रोज बढ़त जावत हे। ए तबाही के जिम्मा कोन लेही?
बिकास के हमन घलो विरोधी नो हन, फेर अइसन बिकास कउन काम के जेहा हमर आने वाला पीढ़ी ले ओकर सांस छीन ले। आज रामगढ़ रोअत हे संगवारी हो, अउ अगर आज घलो हमर गोट (आवाज) तीखर नइ होइस, त कइली हमर माटी हम ला कभू माफ नहीं करही।
अपन माटी बर, अपन हक बर, अब गोट बुलंद करना ही पड़ही!
पिलखा भूमि – अपन माटी अपन गोट टीम (सरगुजा)








