विसेस स्तंभ – पिल्खा भूमि (अपन माटी अपन गोठ)
“जुन्ना कभू नई बूझय ओ आगी, जउन माटी बर सुलगथे, बिरसा के तीर आज घलो, अन्याय के छाती म खसकथे।”
राम-राम संगी हो! पिल्खा भूमि के नवा कोरा पेज “अपन माटी अपन गोठ” म आप जम्मो माटीपुत्र मन के मयाभरे सुवागत हे। ए पेज सिरफ खबर लिखे बर नई हे, ए हमर छत्तिसगढ़िया संस्कृति के धड़कन, हमर पुरखा मन के संसकार अउ हमर जल-जंगल-जमीन के गोठबात आय।
आज 09 जून ए। आज के दिन हमर मनखे मन ला कोनो अइसन-वइसन गोठ नई, बल्कि ए माटी के सबले बड़े रच्छक, ‘धरती आबा’ भगवान बिरसा मुंडा जी के सहादत के गोठ करना हे। आओ, आज ओ महानायक ला सुरता करथन् जउन ह सिरफ 25 बछर के उमिर म इतिहास के छाती म अपन नाम ला अमर लिख दिस।

माटी के जनम अउ मरण: सिरफ 25 बछर के महाक्रांति
भगवान बिरसा मुंडा जी के जनम 15 नवंबर 1875 म उलिहातू (झारखंड) के एक गरीब आदिवासी परिवार म होय रीहिस। ओ समे अंगरेज मन अउ दिकू (बाहरी सोसक) मन हमर जल, जंगल अउ जमीन ला लूटत रीहिन। हमर सीधे-साधे पुरखा मन ला गुलाम बनावत रीहिन।
बिरसा जी ह ए अत्याचार ला देखिन त ओकर लहू म उबाल आ गे। ओमन तीर-धनुष उठाइन अउ संखनाद करिन—“उलगुलान! महाक्रांति!” ओमन नारा दिन: “अबूआ दिसुम, अबूआ राज” यानी हमर देस म हमर राज! ओमन अंगरेज मन के आधुनिक बंदूक अउ तोप मन ला अपन पारंपरिक हथियार अउ संगठन के दम म घुटू टेकवा दिन।
पर अफसोस! माटी के ए लाल ला अंगरेज मन धोखे ले पकड़ लिन अउ 09 जून 1900 म रांची जेल म ओकर मरण (सहादत) होगे। अंगरेज मन कहीन कि ओला हैजा होय रीहिस, पर हमर इतिहास गवाह हे कि ओ क्रांति के आगी ला बुझाए बर ओला जेल म जहर देके मारे गे रीहिस।
अपन गोठ: आज हमर माटी म बिरसा कतका जरूरी हे?
संपादकीय गोठबात: मनीष वैद्य (संपादक, पिल्खा भूमि)
संगी हो, “अपन माटी अपन गोठ” के मंच ले आज हमन एक गंभीर गोठ उठावत हन। आज हमन भगवान बिरसा मुंडा जी के फोटो म फूल-माला त चढा देथन्, पर का ओकर बिचार मन ला अपन अंतस म जगाए हन?
आज घलो हमर छत्तिसगढ़ के हसदेव अंचल ले लेके बस्तर तक, जंगल ला बचाए के लड़ाई जारी हे। आज घलो हमर माटी कतनो परकार के प्रदूषण अउ सोसन के आगी म जलत हे। अइसन समे म बिरसा मुंडा के बिचार हमर बर एक रस्ता देखावइया दीया ए।
भगवान बिरसा मुंडा ह सिरफ अंगरेज मन से नई लड़िन, ओमन समाज के भीतर के कुरुति, नसाखोरी अउ अंधबिस्वास के खिलाफ घलो लड़ाई लड़िन। ओमन कहिन रीहिस कि जब तक समाज भीतर ले मजबूत नई होही, तब तक बाहरी दुस्मन ला नई हराए जा सके।
पिल्खा भूमि के संदेस: हर मनखे म जागे एक बिरसा
आज के जुग म असली ‘उलगुलान’ का ए? आज के उलगुलान ए—अपन सिका (शिक्षा) ला बढ़ाना, अपन लइका मन ला संसकार देना, भ्रष्टाचार के खिलाफ सीना तान के खड़े होना अउ अपन छत्तिसगढ़ी बोली-भाखा अउ संस्कृति ला अउ जादा सुग्घर बनाना।
जब तक हमन अपन हक अउ सच बर आवाज नई उठाबो, तब तक हमर माटी के गोठ अधूरा हे। आओ, आज ओकर पुण्यतिथि म हमन संकलप लेन कि अपन माटी के रच्छा बर कभू पीछे नई हटबो।
‘धरती आबा’ भगवान बिरसा मुंडा जी के सहादत दिवस म “पिल्खा भूमि” परिवार कोति ले कोटि-कोटि नमन। जय जोहार, जय छत्तिसगढ़!








