लेखक: श्रीमती पूजा वैध
पिलखा भूमि/रायपुर, 07 जून 2026 मौसम विभाग ह ए बछर (2026) के मानसून ल लेके जउन डरावना अनुमान लगाय हे, ओकर से हमर अंचल के किसान भाई मन के माथा म चिंता के लकीर खंचाय लगी हे। मौसम वैज्ञानिक मन के कहब हे कि ए साल एल-नीनो के कुप्रभाव के सेती दक्खिन-पच्छिम मानसून सामान्य ले कमजोर रहिही अउ जून के महीना म घलोक पानी के घामी (कमी) दिख सकत हे। देस भर म औसत ले सिरिफ 90 परसिट ही पानी गिरे के संसो हे। अइसन अकाल जइसन हालत ले निपटे बर अब हमर किसान मन ल खेती के लकीर के फकीर बने ले काम नई चलय, बल्कि पानी बचाय वाले वैज्ञानिक तरीका मन ल भुइँया म उतारे बर पड़ही।

‘सीड ड्रिल’ अउ कतार बोनी: कम पानी म घलोक जड़ धरही मजबूती
खेती-किसानी के जानकार मन के मानना हे कि जदि पानी कम घलोक गिरही, तभो ले धान के ‘सीड ड्रिल’ (Seed Drill) ले कतार बोनी (लाइन म बोना) किसान मन बर संजीवन बूटी साबित हो सकत हे। ए पद्धति म बीजा ह एकदम नाप-जोख के सही गहिराई अउ बराबर दूरी म बोयाथे। जेकर से अंकुरण घलोक जबर होथे अउ पउधा मन के जड़ ह भुइँया के भीतर गहिराई तक जाथे। जड़ मजबूत होय के सेती, माटी म जतका घलोक थोर-बहुत नमी रहिथे, ओकर पउधा मन ह पूरा फायदा उठा लेथें अउ सूखा के मार ल सह लेथें।कतार बोनी के एक अउ बड़े गुन ये हे कि पउधा मन एक-दूसर के हक नई मारंय। सबो पउधा मन ल बराबर पानी, खाद अउ घाम (सूरज के अंजोर) मिलथे। लाइन म बोवाय के सेती खेत म निंदाई-कोड़ाई अउ कचरा (खरपतवार) साफ करे म घलोक जादा मिहनत नई लगय, जेकर से खेत के गेलापन जादा दिन तक बने रहिथे।
नैनो डीएपी: पउधा मन बर टॉनिक जइसन असर
ए बछर कृषि विभाग ह किसान मन ल नैनो डीएपी (Nano DAP) अउ नैनो यूरिया अपनाय बर घलोक जोर देवत हे। एमा जउन फास्फोरस के कण रहिथें, ओमन एतका छोटे (सूक्ष्म) होथें कि पउधा मन ओला तुरते अउ असानी से सोख लेथें। जेकर से पउधा मन के सुरु म बढ़वार बने होथे अउ खाद ह फालतू बहे बिना सीधा फसल ल मिलथे।कृषि विभाग ह खरीफ 2026 के ए सीजन म किसान भाई मन ले कतार बोनी, खेत मन के मेढ़ ऊंच करना (मेढ़बंदी), पानी रोके के उपाय अउ जैविक खाद के सही तालमेल मिला के खेती करे के गोहार लगाय हे। वैज्ञानिक तरीका मन ल एक संग अपना के ही कम पानी म घलोक धान के बढ़िया अउ घाता खेती करे जा सकत हे।
📝 पिलखा भूमि संपादक के टिप्पणी:
“बदलते मौसम म किसानी के तरीका घलोक बदलना जरूरी हे”
आज जब मौसम के मिजाज अनिश्चित होवत जावत हे, तब हमर पुरखा मन के पारंपरिक खेती के संग-संग वैज्ञानिक तकनीक के तालमेल बिठाना समय के मांग हे। कम पानी के रोना रोए के बजाय जदि हमर किसान भाई ‘कतार बोनी’ अउ ‘नैनो डीएपी’ जइसन आधुनिक अउ सुघर उपाय मन ल अपनाहीं, त न केवल पानी के बचत होही बल्कि लागत घलोक कम आही। कृषि विभाग के ए सलाह ल सिरिफ कागज म न रख के खेत तक पहुंचाना हमर सबो के कतर्ब हे, ताकि हमर अन्नदाता मन के मिहनत सुखा म घलोक नसाए मत।”— संपादक, पिलखा भूमि
