अंबिकापुर कोतवाली थाना इलाका के सनसनीखेज मामला: न्याय मांग बर पहुंचिन सौ ले ज्यादा ग्रामीण, खाकी के चौखट म खुलगे रसूख के पोल
पिलखा भूमि – अपन माटी अपन गोट
अंबिकापुर (सरगुजा): वाही छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग मुख्यालय अंबिकापुर के कोतवाली थाना इलाका म एक अइसन नजारा देखायला मिलिस, जेला देखके देवता मन के घलो माथा ठनक जाही। भफौली ग्राम पंचायत के सम्मानित उपसरपंच साहब ऊपर एक 14 बछर के आदिवासी नानकुन लइकी के साथ कुकर्म (दुष्कर्म) करइया गंभीर आरोप लगे हे। सच कहे गए हे कि “सौ चूहा खा के बिल्ली हज को चली”, ठीक वइसने जनता अपन कीमती वोट देके जेन महान हस्तियों ल गांव के सेवा करै बर चुनथें, ओ मन अब सेवा के परिभाषा अइसने गजब ढंग ले लिखत हें कि का कहे जाए।

कैसा सेवाभाव भई! बरतन मांजे के बाद इज्जत के सौदा
कहावत हे कि “सेवा परमो धर्मः”, फेर भफौली पंचायत के ये उपसरपंच साहब ह सेवा के अइसन पाठ पढ़ाइन कि सातवां क्लास म पढ़इया वो 14 बछर के नानकुन लइकी बेचारी उपसरपंच के घर म बरतन मांजत रिहिस, खाना बनावत रिहिस अउ ओकर “देखरेख” म कोनो कसर नइ छोड़िन।
जब ये मामला के खुलासा होइस, त आरोपी अउ ओकर संगी-साथी मन तुरंत मैदान म उतरगिन। गांव के परिवार के ऊपर “दया” दिखाते हुए उपसरपंच अउ ओकर चेलवा मन रात-बिरात पैंताला चलइन। “चोर की दाढ़ी में तिनका” वाला कहावत इहाँ एकदम सटीक बैठथे; लइका के परिवार ल समझाइश दे के, रुपिया-पैसा के प्रलोभन दे के, “समझौता” करै के कोसिस करे गे। वाह रे न्याय के ठेकेदार मन! गजब छद्म-विनम्रता हें भईया—पहिले लइकी के इज्जत ल दांव म लगावव, फेर ओकरे कीमत तय करके बड़प्पन के झंडा गाड़व।
पिलखा भूमि के सवाल
पहला सवाल: भई वाह! ये महान जनप्रतिनिधि मन अइसने “संस्कारी” ट्रेनिंग कहां लेथें? “जिस थाली में खाना उसी में छेद करना”—गांव के विकास के बजट के संग-संग अब गरीबों के घर के लइकीमन के जवानी अउ इज्जत घलो उपसरपंच साहब मन के पर्सनल जागीर बन गे हे का?
दूसर सवाल: जब आरोपी महोदय अउ ओकर चेला-चपाटी मन रात भर पैसा के पोटरी लेके गांव भर म मोलभाव करत रिहिन, त ये कारनामा ल देखे के बाद अब प्रशासनिक अउ विधिक शिकंजा कसना कतिक जरूरी होगे हे?
तीसर सवाल: का हम मान के चलथन कि अब गांव म कोनो निर्दोष गरीब के बेटी सुरक्षित रहै बर उपसरपंच साहब के जूठन बरतन धोना अनिवार्य कर दे जाय, ताकि ओकर “सुरक्षा” के ठेका सुरक्षित रह सकय?

पिलखा भूमि के टिप्पणी
“ए देश अउ ए समाज के किस्मत के का कहिए, जतका महान जनप्रतिनिधि मन हें, ओतके गंभीर ये विडंबना हे। उखान हे कि ‘अंधी पीसे कुत्ता खाए’, इहाँ जनता पिसथें अउ रसूखदार मन कायदा के धज्जियां उड़ाथें। उपसरपंच साहब के ये ‘कारनामा’ ह बताथें कि कुर्सी म बइठे बाद इंसान के नजर म कानून, नैतिकता अउ इंसानियत कतिक दूर भाग जाथे। ‘पिलखा भूमि’ के त विनम्र निवेदन ए भईया—कि अब ए महान नेताओं ल कानून के दायरा म लाए जाए, ताकि दूध के दूध अउ पानी के पानी हो सकय। गरीब के बेटी के इज्जत के सौदा करइया मन ल जब तक चौहद्दी म घिसटाइन नइ जाहि, तब तक ए छत्तीसगढ़ माटी के शान अइसने रोवाथे.”
थाना के चौखट म उमड़िस जनता के सैलाब अउ पुलिस के जिम्मेदारी भरे कदम
जब ये मामला के सुग्घर कहानी परिवार अउ गांव वाले मन ल पता चलिस, त “जब जागो तब सवेरा” के तर्ज म करीब 100 झिन ले ज्यादा गांव वाले मन रात के बेरा म अंबिकापुर कोतवाली थाना पहुँचगिन। ए बेरा म पुलिस प्रशासन ह पूरी गंभीरता, तत्परता अउ संवेदनशीलता के परिचय देत हुए स्थिति ल बहुत बढ़िया ढंग ले संभालिस। पुलिस अधिकारिमन तुरंत जनता के बात ल धियान से सुनिन अउ बिना कोनो देरी के तत्काल एफआईआर दर्ज करके निष्पक्ष जांच के दिशा म मजबूत कदम उठाइन। पिलखा भूमि पुलिस के ए त्वरित अउ न्यायसंगत कार्रवाई के सराहना करथे, जेकर से आम जनता के भरोसा कानून ऊपर अउ अड़िग होथे।
