
पिलखा भूमि विशेष: अंबिकापुर
अंबिकापुर: गर्मी की दस्तक के साथ ही अंबिकापुर शहर में पानी को लेकर त्राहि-त्राहि मची हुई है। शहर के विभिन्न वार्डों में जल आपूर्ति की स्थिति बद से बदतर हो गई है। आलम यह है कि लोगों को न तो पर्याप्त पानी मिल पा रहा है और न ही जो पानी मिल रहा है, वह पीने योग्य है। दूषित और बदबूदार पानी की सप्लाई ने अब शहरवासियों के स्वास्थ्य पर भी संकट खड़ा कर दिया है।
नलों से आ रहा गंदा पानी, बीमारियों का बढ़ा खतरा
स्थानीय निवासियों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि नलों से आने वाला पानी इतना गंदा है कि उसे पीना तो दूर, नहाने के काम में भी नहीं लाया जा सकता। दूषित पानी के सेवन से शहर में पीलिया, उल्टी और दस्त जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। कई वार्डों से लोगों के बीमार पड़ने की खबरें भी सामने आ रही हैं, जिससे नागरिकों में भारी दहशत और आक्रोश है।
निगम की कार्यप्रणाली पर खड़े हुए सवाल
इस विकराल समस्या के लिए सीधे तौर पर नगर निगम प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। लोगों का कहना है कि पाइपलाइनों की समय पर मरम्मत न होना, जल स्रोतों की सफाई में कोताही और अधिकारियों की संवेदनहीनता के कारण आज शहर की जनता बूंद-बूंद पानी को तरस रही है।
विष्णु देव पांडेय ने दी आंदोलन की चेतावनी
इस मुद्दे पर प्रखर होते हुए विष्णु देव पांडेय ने नगर निगम को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा:

“पानी जैसी मूलभूत आवश्यकता के लिए भी जनता को संघर्ष करना पड़ रहा है, यह बेहद शर्मनाक और चिंताजनक है। नगर निगम गहरी नींद में सोया है और जनता दूषित पानी पीने को मजबूर है। अगर जल्द ही स्वच्छ और नियमित जल आपूर्ति बहाल नहीं हुई, तो हम नागरिकों के साथ मिलकर निगम प्रशासन के खिलाफ उग्र आंदोलन का बिगुल फूकेंगे।”
प्रमुख मांगें जिन पर टिकी है जनता की नजर:
- सभी वार्डों में स्वच्छ और नियमित पानी की सप्लाई सुनिश्चित हो।
- जर्जर और लीकेज पाइपलाइनों की तत्काल युद्ध स्तर पर मरम्मत की जाए।
- पानी की गुणवत्ता की समय-समय पर लैब टेस्टिंग हो।
- लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
निष्कर्ष: नगर निगम की सुस्ती अंबिकापुर को किसी बड़ी महामारी की ओर धकेल सकती है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस जनआक्रोश के बाद जागता है या जनता को अपनी प्यास बुझाने के लिए सड़कों पर उतरना पड़ता है।
रिपोर्ट: पिलखा भूमि न्यूज़ टीम
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